Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

काटब धान – डॉ इंदु कुमारी

काटब धान सखी रे हुलसायल मनमा आयल अगहन महीनमाधान काटी करब पबनियाचूड़ा कुट करब नेमनमा। कुल देवी के चढ़ायब नागुड़ …


काटब धान

काटब धान - डॉ इंदु कुमारी
सखी रे हुलसायल मनमा

आयल अगहन महीनमा
धान काटी करब पबनिया
चूड़ा कुट करब नेमनमा।

कुल देवी के चढ़ायब ना
गुड़ चूड़ा केला मिला के
श्रद्धा सुमन अर्पण करब
पगडंडी पकड़ चलली रे

सखी मजदूरन की टोली
आगे -पीछे कतारे लगी है
जैसे नेता जी की रैली
सीधा -समर (भोजन) बाँध पोटली

बच्चा -बुदरू संग लेके चलली
खेत और खलिहान मा रे
बह रही है मस्त पवनमा ना
आयल अगहन महीनमा रे

गोद के ललनमा के सुतायल
बीच खेत भेलै झूलनमा रे
माई काटै लागल धानमा
आयल अगहन महीनमा रे।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

Naari by kamal siwani ramgadh bihar

July 3, 2021

 नारी होती जहाँ नारी की पूजा , वहाँ देव बसते हैं । है वह देवी रूप जगत में , ग्रंथादिक

Vaccine lagwa lo bhai by gaytri bajpayi shukla

July 3, 2021

वैक्सीन लगवा लो भाई बुरा समय न कहकर आतापर जब आता कहर है ढाता ।कर न सकोगे फिर भरपाईवैक्सीन लगवा

Zindagi jal Dhar Jaisi by hare Krishna Mishra

July 3, 2021

 जिंदगी जल धार जैसी जिंदगी के हर मोड़ पर, हम अधुरे ही रहे , चल रहा था दो चार कदम,

sukoon-aye talash by mamta kushvaha

July 3, 2021

सुकून -ऐ-तालाश सुकून -ऐ-तालाश सबको है इस जहां में ,हर एक इंसान परेशान है खुद में बस कोई जाहिर कर

kavita mera bharat by madhu pradhan

July 3, 2021

मेरा भारत मेरा प्यारा सबसे न्यारा भारत देशकल- कल करके नदिया बहती झर-झर करके झरने बहते आँखों में बसते दृश्य

kavita vriddho ka samman by madhu pradhan

July 3, 2021

वृद्धों का सम्मान मीठी वाणी बोलकर वृद्धन का सम्मान करो नाज करो संस्कारन पे मत इनका उपहास करो एक दिन

Leave a Comment