Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, story

कहानी प्यार की

कहानी प्यार की सीमा और विमल के प्यार के चर्चे उनके पूरे ग्रुप में खूब थे।दो दिल एक जान थे …


कहानी प्यार की

कहानी प्यार की
सीमा और विमल के प्यार के चर्चे उनके पूरे ग्रुप में खूब थे।दो दिल एक जान थे दोनों,कभी भी कुछ भी असहमति वाली बात उन लोगों के बीच होती ही नहीं थी। उनकी जोड़ी एक आदर्श जोड़ी थी।ऊंचा लंबा गोरा चीट्टा विमल कमदेव का रूप था तो गोरी चंपा वर्णी,हिरनी सी आंखो वाली,गुलाब की पंखुड़ी से होंठ और खुश मिजाज सीमा कोई भी अभिनेत्री से कम नहीं थी।सीमा का कुछ सूचन आया वही विमल को मंजूर था और विमल की कही कोई भी बात सीमा के लिए ब्रह्म वाक्य थी इतना प्यार कि शायद सच्चा नहीं लगे।दफ्तर में भी विमल जैसे काम से फुरसत पाता तो उसके खयाल में सीमा आके बैठ जाती।उसकी सुंदर आंखों में खो जाना विमल को बहुत पसंद था।दोनों जब बातें करते थे तो एक दूसरे में खो से जाते थे।दुनियां जहान को भूल जाते थे,रह जाते थे तो वे दोनों कामदेव और रती सी जोड़ी थी उनकी।इतने प्यार की कल्पना कोई भी कर नहीं सकता था उनके मित्रमंडल में।

दोनों सप्ताह के अंत की राह देखते थे,जैसे छुट्टी आती थी, वे दोनों कहीं घूमने चले जाते थे।कभी कोई मूवी देखना चले जाते थे तो कभी हाथों में हाथ डाले बगीचों में घूमने चले जाते थे। आसपड़ोस वालें भी उनसे थोड़ा इर्षाभाव रखते थे।
एकदीन जब विमल के दफ्तर में काम कम था तो वह सीमा को अचंभित करने घर जल्दी जल्दी पहुंचाना चाहता था।और उसने रिक्शा किया और पहुंच गया अपने घर।घर से थोड़ी दूर रिक्शा रोक कर उतर गया और घर तक चलके गया ताकि उसके आगमन का पता सीमा को नहीं चले।घर जल्दी पहुंचने की खुशी में दरवाजे पर लगी बेल नहीं बजा कर उसने हौले से दरवाजा खोला तो खुल गया और सीमा का नाम पुकारने ही वाला था कि उसे सीमा की आवाज सुनाई दी तो हैरान सा रह गया।सीमा किसी से कह रही थी ,”तुम्ही से तो बचपन से मैंने प्यार किया हैं,कभी भी तुम्हे मैं अपने दिल से निकाल नहीं पाई हूं।विमल से शादी सिर्फ मेरे माता पिता को खुश रखने के लिए ही की थी।हम ऐसे ही हफ्ते में दो तीन दिन मिलते रहेंगे और फिर कोई अच्छा दिन देख कर हम हमेशा के लिए मिल जायेंगे।”
इतना सुनना था कि वह दरवाजे से मुड़ गया और चल दिया पता नहीं कहां के लिए।बस चलता ही गया,चलता ही गया।
सीमा जब बाहर आई तो उसने अधखुला दरवाजा देखा किंतु वह कैसे खुला था उसके राज से नावाकिफ थी वह।आश्चर्य से दरवाजे को देखती रही किंतु समझ नही पाई कि उसी दरवाजे से उसका सच्चा प्यार बाहर निकल गया था।जो उसके पास था वह तो सिर्फ शारीरिक प्यार का देवता था।
शाम के छह बजने वाले थे तो उसने कुछ रसोई में काम कर विमल के आने की राह देख रही थी और वह राह देखती ही रह गई क्योंकि प्यार में धोखा खाने वालों की वापसी नामुमकिन होती हैं।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

मान हैं मुझे तुम पर-जयश्री बिरमी

January 13, 2022

मान हैं मुझे तुम पर आन भी हैं तू मान भी हैं तूहिंदी तू हिंदुस्तान की जान हैं तूतेरी मीठे

सम्मान का बोझ- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

 सम्मान का बोझ  कहीं पढ़ा था की लड़कियों का आत्मसम्मान बढ़ाओ शादी की उम्र नहीं,सही बात हैं,लड़कियों को सम्मान मिलना

आज की द्रौपदी- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

आज की द्रौपदी एक तो द्रौपदी थी तबअनेक है आज भीक्यों बचा न पाए आज के कृष्णजब बिलखती हैं वहआज

ली उबासी और निगली मक्खी- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

 ली उबासी और निगली मक्खी खूब चर्चा में हैं मुख्य मंत्री चन्नी का पराक्रम, कांड तो शायद कह सकते इसे।जो

अहंकार-R.S.meena indian

January 7, 2022

अहंकार गोलू जब भी मोनू को देखता अपने दोस्तों को कहा करता-किसी जमाने मे मोनू बहुत पैसे वाला था मगर

नशा एक परछाई-जयश्री बिरमी

January 7, 2022

नशा एक परछाई क्यों चाहिए तुम्हे वो नशाजो तुम्हे और तुम्हारे प्यारोंको करता बरबाद हैं नशा करों अपने काम काया

PreviousNext

Leave a Comment