Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, story

कहानी-जो करे सेवा उसे मिले मेवा

जो करे सेवा उसे मिले मेवा एक छोटा सा गांव था ,दो बेटों के साथ रेवती बहुत आराम से रह …


जो करे सेवा उसे मिले मेवा

जयश्री बिरमी  अहमदाबाद

एक छोटा सा गांव था ,दो बेटों के साथ रेवती बहुत आराम से रह रही थी।दोनों बेटों को बहुत प्यार से पाला था उसने।जो जमीन उसके पति के निधन के समय उसके पास थी उसी पर खेती कर बच्चों का पालन पोषण और पढ़ाई लिखाई और घर को बड़ी किफायत से चलाया था उसने।
जब दोनों बेटे बड़े हुए तो एक के बाद एक दोनों की शादी करदी।बड़ी बहू तब तक तो ठीक थी जब तक छोटे बेटे की शादी हुई और छोटी बहु का आगमन हुआ,जैसे ही छोटी बहु आई, जो बहुत गुणी थी उसका रवैया ही बदलने लगा।घर का काम धीरे धीरे छोटी बहु के सर पर डालती गई और छोटी बहु को भी तानें सुनाती रहती थी ।कुछ दिन तो रेवती ने देखा लेकिन जब हर दिन बात बढ़ती गई तब एक दिन बड़े बेटे को बुलाकर उसे अपनी पत्नी के साथ घर के दूसरे हिस्से में जहां दो कमरे और एक रसोई थी वहां रहने के लिए बोल दिया।कुछ बर्तन और दूसरा समान ले वह अपनी पत्नी के साथ अलग रहने लगा।पास में ही रहती छोटी बहु की हर बात पर ध्यान रख बड़ी बहू उसके नुक्स निकलती थी।लेकिन छोटी बहु थी कि अपने किसी भी फर्ज से चूक नहीं करती थी।सुबह रेवती के चरण स्पर्श करती थी फिर रेवती के नहाने का गरम पानी रखना,पूजा के लिए फूल और दिया तैयार कर प्रसाद बना के रख देती थी ,बहु की सेवा से रेवती खूब प्रसन्न थी और उसे बहुत ही आशिषें देती थी।
यही बात बड़ी बहू को अखरती रहती थी।एक बार छोटी बहु अपने मायके जा रही थी किंतु उसे अपनी सास की सेवा की इतनी आदत हो गई थी कि पूछो मत।उसने सास को मनाया कि वह भी साथ चली जाएं लेकिन उसने मना कर दिया।
अब उसने गांव का एक मूर्तिकार था उसे बुलाया और अपनी सास की मूरत बनवाई जिसे साथ ले वह मायके जाने की लिए चल पड़ी। सास की मूरत को लिए वह चली जा रही थी सर्दियों के दिन थे तो शाम भी जल्दी ढल गई और जंगली जानवरों का भी डर था तो वह एक द्रख्त पर चढ़ के बैठ गई।जरा सी आंख लगी की नीचे भाग म भाग की आवाजे आने लगी।उसने देखा की उसकी सास की मूरत नीचे पड़ी थी पास में ही किसी ने आलाव जलाया था और उसीके पास बहुत सारे हीरे मानेक से जड़ित गहने पड़े हुए थे।उसने पेड़ से उतर कर देखा तो दूर दूर कुछ लोग भागे जा रहे थे।वह समझ गई कि को भाग गए हैं वे चोर थे तो उसने सारे गहने उठाए और वापस घर की और चल पड़ी और अपने पति और सास को सारी बातें बताई।
अब ये सब बातें उसकी जेठानी को भी पता चली तो उसे भी लालच आया और ठीक वैसे ही अपनी सास की मूरत बना मायके जाने निकल पड़ी,और जिस पेड़ के नीचे राख पड़ी थी उसी के उपर जा बैठ गई और चोरों का इंतजार करने लगी और उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब पेड़ के नीचे कुछ लोग बाते करते हुए आए,बैठे और आलाव जलाने लगे।जैसे ही आलाव जला उसने अपनी सास की मूरत को जोर से नीचे फेंका,पहले तो चोर भागने लगे किंतु ,ऐसा दुबारा होने से शक हुआ और उन में से एक पेड़ पर चढ़ा और उसे नीचे उतरा और खूब प्रताड़ित किया, और इल्जाम लगाया कि इससे पहले भी उसने उनका धन चुराया था।उसने लाख बताने की कोशिश की, कि वह बेगुनाह थी,उसने तो पहली बार ही उनको देखा था लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी और उसका सिर मुंडवा के मुंह पर कालिख पोत के चले गए।इस हालत में जब वह अपने घर पहुंची तो किसी ने भी उसे पहचाना नहीं किंतु उसने रो रो कर अपनी बात बताई तब सब ने उसे सांत्वना दी और बोला जो करे सेवा उसको मिले मेवा जो जाए लेने उसको पड़ते हैं देने।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

लघुकथा-जीवंत गजल | jeevant gazal

January 13, 2023

लघुकथा-जीवंत गजल हाथ में लिए गजल संध्या का आमंत्रण कार्ड पढ़ कर बगल में रखते हुए अनुज ने पत्नी से

कहानी-पिंजरा | Story – Pinjra | cage

December 29, 2022

कहानी-पिंजरा “पापा मिट्ठू के लिए क्या लाए हैं?” यह पूछने के साथ ही ताजे लाए अमरूद में से एक अमरुद

लघुकथा–मुलाकात | laghukatha Mulakaat

December 23, 2022

 लघुकथा–मुलाकात | laghukatha Mulakaat  कालेज में पढ़ने वाली ॠजुता अभी तीन महीने पहले ही फेसबुक से मयंक के परिचय में

लघुकथा –पढ़ाई| lagukhatha-padhai

December 20, 2022

लघुकथा–पढ़ाई मार्कशीट और सर्टिफिकेट को फैलाए उसके ढेर के बीच बैठी कुमुद पुरानी बातों को याद करते हुए विचारों में

तबस्सुम| Tabassum

November 25, 2022

तबस्सुम तबस्सुम| Tabassum  एक ऐसी कलाकारा जिसको भूल पाना मुश्किल होगा,हालाकि वह उतनी मशहूर नहीं थी। न ही बिग बैनर

घायल परिंदे| Ghayal Parinde

November 19, 2022

घायल परिंदे मत उड़ इतना मासूम परिंदेसब जगह रह देखें हैं दरिंदेमाना आसमां बड़ा बड़ा हैंलेकिन वहां भी छैक बड़ा

PreviousNext

Leave a Comment