Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Tamanna_Matlani

कहां खो रही है….?

नन्हीं कड़ी में…. 🌞 आज की बात 🌞 🌹 कहां खो रही है….?(कविता)🌹 Pic credit – freepik.com मेरे देश की …


नन्हीं कड़ी में….
🌞 आज की बात 🌞

🌹 कहां खो रही है….?(कविता)🌹

Hindi divas special
Pic credit – freepik.com

मेरे देश की ये हालत
देखो क्या हो रही है….?
हिंद देश की हिंदी भाषा
कहां खो रही है….?

ढूंढती रही इसे
दर-बदर-इधर-उधर,
अंग्रेजी भाषा के प्रभुत्व ने
लिया इसे जकड़…..

कहां खो रही है
मेरी हिंदी कहां खो रही है?
देवनागरी लिपि मेरी
कहां खो रही है….?

क्यों आज इसकी हालत
दयनीय हो गई है….?
क्यों हिंदी किताबें
गुमसुम सी हो रही हैं….?

हिंदी भाषा है इतनी
सुमधुर जानी पहचानी,
फिर भी परीक्षा प्रणाली से
हिंदी भाषा दूर हो रही है….

हमारी पहचान देखो
धूमिल हो रही है,
हिंद देश की हिंदी भाषा
क्यों ऐसे खो रही है….?

हिंदी भाषा से ही
भारत की पहचान पुरानी,
तभी तो मानता है इसे
अपनी भाषा हर हिंदुस्तानी

है निराली यह भाषा
बोलता हर एक हिंदुस्तानी,
हिंदी भाषा से ही है
शान हमारी तुम्हारी….

ऐ नौजवानों ! तुम
न खोने दो यूं इसे,
मर भी जाएं तो भी
ना इसे हम कभी बिसरे….

मेरे देश की ये हालत
देखो क्या हो रही है…..?

About author 

Tamanna matlani

तमन्ना मतलानी
गोंदिया(महाराष्ट्र)


Related Posts

निडर बनो-डॉ. माध्वी बोरसे

December 10, 2021

निडर बनो! चुनौतियों का सामना करते हैं,सच्चाई के लिए लड़ते हैं,इंसानियत पर डट कर चलते हैंचलो निडर बनते हैं! आंसुओं

मां भारती का लाल-हेमलता दाहिया…

December 10, 2021

“मां भारती का लाल” था वीर पुत्र वो बलिदानी,देता दुश्मनों को ललकार.मुख मंडल में तेज सूर्य,आंखो में ज्वाला अंगार .रग-रग

अच्छी चाह तो अच्छी राह- डॉ. माध्वी बोरसे!

December 10, 2021

अच्छी चाह तो अच्छी राह! चलो सोचे और बोले एक समान, जिंदगी को बना ले, थोड़ा और आसान,दिल से और

जिंदगी का रिमोट कंट्रोल अपने हाथों से चलाना

December 10, 2021

अपनी जिंदगी का रिमोट कंट्रोल अपने हाथों से चलाना! उन्होंने मुझे हंसा दिया,उन्होंने मुझे रुला दिया,उन्होंने मुझे गुस्सा दिलाया,उन्होंने मुझे

हम सभी एक समान-डॉ. माध्वी बोरसे

December 10, 2021

हम सभी एक समान! जाति, धर्म से क्यों करते हैं भेदभाव,क्यों नहीं इंसानियत को आजमाओ? हम सभी का रक्त का

आंसू छलके- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 10, 2021

आंसू छलके आंसू भरकर स्वागत करना, बहुत पुरानी परंपरा अपनी,इंतजार लंबी जब होती है ,मन के आंसू छलक आते हैं,।।

Leave a Comment