Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Gaurav_hindustani, lekh

कहाँ गया बड़ों के नाम के आगे का “श्री” ?

 कहाँ गया बड़ों के नाम के आगे का “श्री” ?                      …


 कहाँ गया बड़ों के नाम के आगे का “श्री” ? 

गौरव हिन्दुस्तानी  (बरेली, उत्तर प्रदेश )

                                   गौरव हिन्दुस्तानी(बरेली, उत्तर प्रदेश )

भारत विश्व भर में अपनी संस्कृति एवं सभ्यता के लिए विख्यात है परन्तु आधुनिकता इतनी तेजी से अपने पैर पसार रही है कि उसका प्रभाव सम्पूर्ण भारत पर, भारतीय संस्कृति पर एवं भारत की सभ्यता पर साफ़ देखा जा सकता है। वर्तमान में चल रहे मेरे एक शोध में (जो कि सोशल मीडिया से सम्बन्धित है) एक ऐसा दृश्य सामने आया जो वास्तव में आश्चर्यचकित करने वाला है जिस पर हमारी दृष्टि या तो पड़ नहीं रही है या फिर हम ऑंखें बन्द किये हुए हैं। मेरे चल रहे शोध में विद्यार्थियों ( विश्वविद्यालय स्तर के १२० विद्यार्थी पर किया गया ) से कुछ व्यक्तिगत जानकारी भी ली गयी जैसे पिता का नाम। आश्चर्य करने वाला तथ्य यह है कि किसी भी विद्यार्थी ने अपने पिता का नाम भरते समय पिता के नाम के आगे “श्री” नहीं लगाया जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। वर्तमान में भारत की साक्षरता दर लगभग ७४% है लेकिन नैतिक शिक्षा का पहला पाठ ही हमारी युवा पीढ़ी भूलती जा रही है। भारतीय समाज में यह परम्परा रही है कि जब भी कोई बच्चा अपने पिता, अपनी माता या अपने बड़ो का परिचय देता है तब श्री, श्रीमती अवश्य लगाना चाहिए। गाँवों तक में किसी बच्चे के द्वारा अपने बड़ों का परिचय देने पर यदि श्री नहीं लगाया जाता था तब गाँव के अशिक्षित लोग तक टोंक देते थे कि बेटा बड़ों के नाम से पहले “श्री” लगाते हैं। फिर वर्तमान में युवा पीढ़ी अपने संस्कारों में पिछड़ क्यों रही है?

मैंने इसके कारण के बारे में जानने का प्रयास किया और विश्लेषण किया तब यह पाया कि अधिकांशतः किसी भी प्रकार का ऑनलाइन फॉर्म (चाहें सरकारी फॉर्म हो या फिर किसी भी प्राइवेट संस्था का फॉर्म ) भरते समय वहाँ पिता के नाम आगे का श्री नहीं भरवाते हैं यहाँ तक कि साफ़ मना कर देते हैं कि श्री, श्रीमती न लगाएँ। क्या यह सभ्यता, संस्कारों का हनन नहीं है ? क्या यह संस्कारों के पहले पाठ की मृत्यु नहीं है ?

फेसबुक, ट्विटर एवं यूट्यूब आदि जैसी सोशल मीडिया वेबसाइट पूरी दुनिया का डेटा व्यवस्थित कर रहीं हैं तो क्या “श्री” को व्यवस्थित करने में इतनी समस्या आती है कि उसको सभी फॉर्म से हटा दिया गया है। हमें ऐसी असहनीय त्रुटियों के लिए आवाज उठानी चाहिए। यदि ऐसे ही संस्कारों के पहले पाठ में ही फ़ेरबदल होते रहे फिर आगामी पीढ़ी को नैतिक शिक्षा के अर्थ को समझाना बहुत जटिल हो जायेगा। यदि वास्तव में हम अपनी संस्कृति, अपने बच्चों में संस्कारों को बचाये रखना चाहते हैं तब हमें ऐसी भूल सुधारनी होगी तथा किसी भी सरकारी एवं प्राइवेट संस्था के फॉर्म में अपने बड़ों के नाम के आगे “श्री” लगाने के कॉलम की माँग करनी होगी

गौरव हिन्दुस्तानी

(बरेली, उत्तर प्रदेश )

9627577080

बी. टेक. | बी. एड | एम. एड. | एम. ए.

https://www.gauravhindustani.in/


Related Posts

Masoom sawal by Anita Sharma

November 12, 2021

 ” मासूम सवाल” एक तीन सवा तीन साल का चंचल बच्चा एकाएक खामोश रहने लगा….पर किसी ने देखा नही।उस छोटे

Prithvi ka bhavishya by Jayshree birmi

November 12, 2021

 पृथ्वी का भविष्य  हमारे पुराणों और ग्रंथों  में पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर जो भी प्रलय हुए हैं उसके बारे

Rastriye shiksha shadyantra ka shikar by satya prakash singh

November 10, 2021

राष्ट्रीय शिक्षा षड्यंत्र का शिकार भारत में राष्ट्रीय शिक्षा निम्न वर्ग के लिए अत्यंत महंगी होती जा रही है। भारत

Ek aur natwarlal by jayshree birmi

November 7, 2021

 एक और नटवरलाल  एक वो नटवरलाल था जिसमे ताज महल,सांसद भवन और न जाने क्या क्या बेच दिया था और

Deepak kranti ‘the real super hero award 2021’ se sammanit

November 7, 2021

 दीपक क्रांति, ‘द रियल सुपर हीरो अवॉर्ड-2021’ से सम्मानित 7 नवंबर,2021,झारखंड , एफ.एस.आई.ए.(फोरेवर स्टार इंडिया अवार्ड्स) के सी.ई.ओ. राजेश अग्रवाल

देश के युवाओं को एक सामंजस्यपूर्ण और समावेशी समाज की दिशा में प्रयास करने के लिए आगे आने की ज़रूरत

November 7, 2021

 देश के युवाओं को एक सामंजस्यपूर्ण और समावेशी समाज की दिशा में प्रयास करने के लिए आगे आने की ज़रूरत 

Leave a Comment