Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

कविता-हार और जीत जितेन्द्र कबीर

हार और जीत ‘हार’ भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए ‘निराश’लेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने अंतर्मन …


हार और जीत

कविता-हार और जीत जितेन्द्र कबीर

‘हार’ भले ही कर ले इंसान को
कुछ समय के लिए ‘निराश’
लेकिन वो मुहैया करवाती है उसको
अपने अंतर्मन में झांकने का
दुर्लभ अवसर,
संघर्ष की राह चल पाए वो अगर
अपनी कमियां सुधार कर
तो ‘कामयाबी’ करती है
उसका वरण।

‘जीत’ भले ही कर ले इंसान को
कुछ समय के लिए’खुश’
लेकिन वो लाती है अपने साथ
जिम्मेदारी भी
उस कामयाबी को बरकरार रखने की,
और यकीन मानों!
कामयाबी बरकरार का संघर्ष भी
चैन से बैठने नहीं देता
कभी इंसान को,

सच तो यह है कि ‘खोने’ का डर
ज्यादा बेचैनी वाला अहसास है
‘पाने’ की उम्मीद के सामने
हर हाल में।

-जितेन्द्र ‘कबीर
जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

Click here👉 Like us on Facebook
Click here👉 Follow us on Instagram


Related Posts

मेरे किस्से -सतीश सम्यक

February 7, 2022

मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी

बेरोजगार हूं-दीप मदिरा

February 7, 2022

बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 6, 2022

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम- सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम हे बापू हे राष्टृपिता संत साबरमती केपुजारी अहिंसा केतुम्हें नमन हैकोटि कोटि प्रणाम है।देश में आज

दोस्तों के नाम की शाम-सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

दोस्तों के नाम की शाम आइए!कुछ करते नहीं तो बस इतना करते हैं,एक शाम दोस्तों के नाम करते हैं,मौज मस्ती

Leave a Comment