Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Priti Chaudhary

कविता –हलचल| kavita halchal

शीर्षक-हलचल हलचल हिय में हो रही ,जैसे नदी तरंग ।आकुल मैं नवयौवना,पुलकित है हर अंग।। जाने कब होंगे मुझे, उस …


शीर्षक-हलचल

हलचल हिय में हो रही ,जैसे नदी तरंग ।
आकुल मैं नवयौवना,पुलकित है हर अंग।।

जाने कब होंगे मुझे, उस प्रियवर के दर्श।
जिसके मुख को देखकर, मिले प्रेम का अर्श।।
लेकर मन की तूलिका, सजा रही नित रंग।
हलचल हिय में हो रही, जैसे नदी तरंग।।

मिलन रागिनी मन सुने, करे प्रणय की बात।
उड़े कल्पना लोक उर, जागे सारी रात।।
जैसे बहती है हवा, ऐसी हृदय उमंग।
हलचल हिय में हो रही, जैसे नदी तरंग ।।

मीठे-मीठे दर्द से ,मन पाता आराम।
प्रीति अनूठी मीत की, मिलती है बेदाम।।
काश! उम्र भर के लिए, रहूँ मीत के संग।
हलचल हिय में हो रही, जैसे नदी तरंग।।

About author 

प्रीति चौधरी "मनोरमा" जनपद बुलंदशहर उत्तर प्रदेश

प्रीति चौधरी “मनोरमा”

जनपद बुलंदशहर
उत्तर प्रदेश

Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment