Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

कविता-समाज में और जागरूकता लाए !

समाज में और जागरूकता लाए ! समाज में जागरूकता लाए,सभी को शिक्षित बनाए,बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए, समाज में …


समाज में और जागरूकता लाए !

डॉ. माध्वी बोरसे!

समाज में जागरूकता लाए,
सभी को शिक्षित बनाए,
बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए,
समाज में थोड़ी और जागरूकता फैलाएं !

कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाएं,
बाल विवाह के खिलाफ खड़े हो जाएं,
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएं,
समाज में थोड़ी और जागरूकता फैलाएं!

दहेज पर प्रतिबंध लगाए,
कुरीतियों से कैसे लड़ना है, सबको समझाएं ,
तंबाकू, शराब की लत को छुड़वाए,
समाज में थोड़ी और जागरूकता फैलाएं !

समाज में, सामाजिक समानता लाएं,
जाति प्रथा धर्मनिरपेक्ष को छोड़कर मानवता का धर्म अपनाएं,
सभी को सम्मान देते चले जाएं ,
समाज में थोड़ी और जागरूकता फैलाएं !

अहिंसा का रास्ता अपनाएं ,
शांति और प्रेम से प्रयास करते चले जाए ,
हर जरूरी कानून की जानकारी पाएं,
समाज में थोड़ी और जागरूकता फैलाएं !

आसपास स्वच्छता को बढ़ाएं,
कल्याण के कार्यों को अपनाएं,
देश के नागरिक होने के प्रति अपने कर्तव्य को बखूबी निभाए,
समाज में थोड़ी और जागरूकता फैलाएं!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

Leave a Comment