Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

कविता शब्द/kavita – shabd

कविता शब्द/kavita shabd  जब शब्द ही निशब्द हो जातें हैं दिल के भाव दिल ही में रह जातेंबातें दिलों की …


कविता शब्द/kavita shabd 

कविता शब्द/kavita - shabd
जब शब्द ही निशब्द हो जातें हैं

दिल के भाव दिल ही में रह जातें
बातें दिलों की दिल खोल कर शब्द ही कह जाते हैं
शब्द देते हैं शब्द आंखों के भाव को
अंतर की पीड़ा और प्रतिभावों को
शब्दों का वजन होता हैं बहुत ही
कभी कम तो का कभी ज्यादा होता हैं
कक्षा भी तो होती बहुत शब्दों की
कभी उत्तम तो कभी कनिष्ठ होते हैं
देते हैं भाव भजन के अर्थों को
भगवान से अनुनय का मौका देते हैं
बोले तो भाव पूर्ण बनते लिखे तो
अर्थपूर्ण बन जातें हैं
शब्दों को शब्दों से समझ ले आओ
शब्दों की अनुपम भाषा की बात
शब्दों से ही करते हैं

About author

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

#rishisunak rishi sunak

Related Posts

अंतिम संदेश।(Last message)

August 31, 2022

अंतिम संदेश। जिंदगी का क्या भरोसा,कब हमारा आखरी पल हो,कभी खुद को तो कभी लोगों को कोसा,पर कौन जाने कि

कविता –प्रेम( प्रेम पर कविता)

August 30, 2022

कविता –प्रेम ( प्रेम पर कविता) प्रेम शब्द जब युवाओं के सामने आया बस प्रेमिका का खुमार दिल दिमाग में

एहसास एक लड़की के

August 30, 2022

“एहसास एक लड़की के” दुनिया मेरे लिए ख़ौफ़ की बिहड़ नगरी है,अंधेरों से नहीं मुझे उजालों से डर लगता है,

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान।

August 30, 2022

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान। यह कैसा शब्द है कन्यादान, कौन करता है अपनी जिंदगी को दान,माता- पिता की जान से बढ़कर,कैसे

हां मैं हूं नारीवादी!

August 28, 2022

हां मैं हूं नारीवादी! नारीवाद के प्रमुख प्रकार, स्‍त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार,ऐसा विश्‍वास या सिद्घांत,भेदभाव का हो देहांत,और

खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता

August 28, 2022

कविता: खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता  कभी

PreviousNext

Leave a Comment