Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

कविता-विकास के नाम से सुना था/vikas ke nam se soona tha

कविता-विकास के नाम से सुना था विकास के नाम से सुना था पर उसका भी दामन खाली हैकिसे सुनाऊं अपनी …


कविता-विकास के नाम से सुना था

विकास के नाम से सुना था
पर उसका भी दामन खाली है
किसे सुनाऊं अपनी व्यथा
जीवन अब बदहाली है

वित्तीय सहायता का
मन स्वाली है
कोई दे नहीं रहा हैं
क्योंकि सभका दामन खाली है

किसे सुनाऊं अपनी व्यथा
वित्तीय रूप से बिफोर कोरोना
मैं बहुत सुदृढ़ था
यूं खाली हो जाऊंगा पता न था

दुकान में ग्राहक नहीं है
ग्राहक के पास पैसा नहीं है
सभका पैसा ऐसा चला जाएगा
ऐसा बिल्कुल पता न था

सुनते हैं मीडिया से हमारा राष्ट्र
कर रहा है आज बहुत विकास
डिजिटल के बहुत आयाम
हो रहे हैं ख़ास

ऐसा जोरदार विकास होगा
बिल्कुल भी पता न था
व्यक्तिगत विकास के लिए हो जाऊंगा
मैं मोहताज़ ऐसा बिल्कुल पता न था

कैसे सुनाऊं अपनी व्यथा
बैंक अकाउंट खाली है
ज़मा पूंजी पूरी उठाली है
हालात ख़स्ता दामन खाली है

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

जब वह चुप है- डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

जब वह चुप है! जब वह चुप है इंसान,क्यों कर रहा तू हर जगह बखान,निंदा करना सबसे बड़ा पाप,हर गलती

अंदाजा-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

अंदाजा! ठहरा हुआ दरिया होता है बहुत गहरा ,मुस्कुराहट के पीछे भी हे एक खामोश चेहरा,किसी भी हस्ती को अंदाजे

खास-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

खास! जब तक तुझ में सांस है,सफलता की आस है,खुशनुमा सा एहसास है,पूरा जोश और साहस है,मानो तो कुछ भी

सरोजिनी नायडू!-डॉ. माध्वी बोरसे

February 14, 2022

सरोजिनी नायडू! हमारे देश की कोकिला,एक महान क्रांतिकारी महिला,बेहतरीन इनकी साहित्य गतिविधियां,अनेकों इनकी प्रसिद्धिया! सच्ची देशभक्त और क्रांतिकारी वीरांगना,हम सभी

सिर्फ शुद्धिकरण ख्याति पाए-वीना आडवानी तन्वी

February 13, 2022

सिर्फ शुद्धिकरण ख्याति पाए क्या साहित्यकार वही सही जिसके शब्दों में शुद्धिकरण समाएमात्रा, अलंकारों में कोई कमी न आए।।क्या एक

“लिहाफ़ ही मेरा छोटा है”-भावना ठाकर ‘भावु’

February 13, 2022

“लिहाफ़ ही मेरा छोटा है” दिल पर प्रताड़ना का पत्थर पड़ा है और मैं साँसें ढूँढ रही हूँ, अश्क नहीं

Leave a Comment