Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Prem Thakker

कविता – याद करती हो?

याद करती हो? सुनो दिकु…. क्या आज भी तुम मुज़े याद करती हो?मेरी तरह क्या तुम भी, आँखें बंदकर मुज़ …


याद करती हो?

कविता – याद करती हो?

सुनो दिकु….

क्या आज भी तुम मुज़े याद करती हो?
मेरी तरह क्या तुम भी, आँखें बंदकर मुज़ से बात करती हो?

गज़ब का मोड़ ले लिया, तुम ने और ज़िन्दगी ने तुम्हारी
पर आज भी, तुम्हें हरपल याद करने की आदत है हमारी

क्या प्रेम के प्यार पर, आज भी विश्वास करती हो?
सुनो दिकु, क्या आज भी तुम मुज़े याद करती हो?

प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए

About author

प्रेम ठक्कर | prem thakker

प्रेम ठक्कर
सूरत ,गुजरात 

ऐमेज़ॉन में मैनेजर के पद पर कार्यरत  

Related Posts

सुनियोजित अभियान- जितेंद्र कबीर

November 23, 2021

 सुनियोजित अभियान एक आठवीं फेल नौजवान  इतिहास के एक अध्यापक से बहस के दौरान देकर पूरे इतिहास को झूठा और

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु – सिद्धार्थ गोरखपुरी

November 23, 2021

 बड़े चालाक हो मेरे प्रभु  बड़े चालाक हो मेरे प्रभु हर गुत्थी सुलझाए रखते हो। बस हमे ही जीवन मृत्यु

मिलन – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 मिलन हो रहा है मधुर मिलनसुदूर गगन धरा का यूँगोधूली की क्षितिज बेला में। गवाह चाँद सितारे हैंगगन ने झुक

कविता- माई से- सिद्धार्थ गोरखपुरी

November 23, 2021

 कविता- माई से हम कितने क़ाबिल है ये कमाई तय करती है। हम हमेशा से क़ाबिल हैं ये बस माई

सफर – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 सफर जिंदगी में चुनौतियां बहुत है मगर….. डगर मुश्किल भरी है। सफर तो चुनौतियों भरा है मगर…… बढ़ते जाना बाधाओं

प्रेम हमेशा रहेगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

November 23, 2021

 प्रेम हमेशा रहेगा मजबूरियां सांसारिक हैं हमारीख़त्म हो जाएंगी देह के साथ ही,लेकिन प्रेम अमर है आत्मा की तरहरहेगा तब

Leave a Comment