Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Prem Thakker

कविता – याद करती हो?

याद करती हो? सुनो दिकु…. क्या आज भी तुम मुज़े याद करती हो?मेरी तरह क्या तुम भी, आँखें बंदकर मुज़ …


याद करती हो?

कविता – याद करती हो?

सुनो दिकु….

क्या आज भी तुम मुज़े याद करती हो?
मेरी तरह क्या तुम भी, आँखें बंदकर मुज़ से बात करती हो?

गज़ब का मोड़ ले लिया, तुम ने और ज़िन्दगी ने तुम्हारी
पर आज भी, तुम्हें हरपल याद करने की आदत है हमारी

क्या प्रेम के प्यार पर, आज भी विश्वास करती हो?
सुनो दिकु, क्या आज भी तुम मुज़े याद करती हो?

प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए

About author

प्रेम ठक्कर | prem thakker

प्रेम ठक्कर
सूरत ,गुजरात 

ऐमेज़ॉन में मैनेजर के पद पर कार्यरत  

Related Posts

हार क्यों मान ली जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

हार क्यों मान ली जाए? बुरे से बुरा क्या हो सकता हैहमारे साथ?यही कि हमारी धन – संपत्तिहमारे हाथ से

सफेद आसमां- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सफेद आसमां कड़ाके की सर्दी मेंरजाई का मोह छोड़ पाओ अगरतो निकलो बाहर जराआंगन चौबारे तक, देखो ऊपर!आसमान बरसा रहा

खट्टी मीठी यादें – डॉ इंदु कुमारी

January 6, 2022

खट्टी मीठी यादें आती है मानस पटल परउभरकर वो सुनहरी यादें प्रेम रस में भीगा -भींगामधुरमय स्नेहिल सौगातें जिनकी यादें

नव वर्ष – डॉ. इन्दु कुमारी

January 6, 2022

नव वर्ष नववर्ष तो नववर्ष हैअंग्रेजी हो या हिन्दी मधुमय हो जीवन येनई उल्लास के साथ स्फुरण हो विलक्षण ऐतिहसिक

पैगाम – डॉ. इन्दु कुमारी

January 6, 2022

पैगाम ह्रदय को न बंजर होने देनालगाओ प्रेम के पौधे भी स्नेह से सींच -सींच करकेउगाओ प्रेम वाटिका भी मिली

अजीज मेरे- डॉ. इन्दु कुमारी

January 6, 2022

अजीज मेरे अलविदा ना कहना मुझेदिसम्बर की तरह मुझेआती है जनवरी आयेखुशियाँ भी ढेरों लाएं महकती रहे बगिया तेरीचहकती रहे

Leave a Comment