Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, R.S.meena

कविता- मैं तुमसे प्यार करता हूँ

 कविता- मैं तुमसे प्यार करता हूँ R.S.meena Indian मैं चाहता हूँ तुमको,ना इनकार करता हूँ । मजबूर हूँ मैं दिल …


 कविता- मैं तुमसे प्यार करता हूँ

Short Story- Gelly - R.S.meena Indian
R.S.meena Indian

मैं चाहता हूँ तुमको,ना इनकार करता हूँ ।

मजबूर हूँ मैं दिल का इजहार करता हुँ ।।

ना मैं तलवार से ,ना इस जमाने से डरता हूँ ।

मैं तुमसे प्यार करता हूं,मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।।

जब से तुम्हे देखा था तुमको अपना माना था ।

वादा किया था रब से तुमको ही आजमाना था ।।

तेरे सिवा हर किसी को मैं इनकार करता हूँ ।

मैं तुमसे प्यार करता हूँ,मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।।

ताउम्र तुम्हे ही चाहना ये रब से मेरी ख्वाहिश है ।

सात जन्म तक साथ रहूं यही मेरी परमाहिश हैं ।।

ना छुपकर बात करता हूँ,ना किसी पे वार करता हूँ ।

खुले आम कहता हूँ, के मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।।

मोहब्बत हैं अगर मुझसे,तो फिर क्यों डरता हैं ।

“स्वरूप” जिस्म से नहीं,रूह से प्यार करता हैं ।।

सबके सामने मैं अपना गुनाह कबूल करता हूँ ।

प्यार का इज़हार करता हूँ,मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।।

R.S. meena indian


Related Posts

गन्दा खेल- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

गन्दा खेल वोट तन्त्र में जनता के विचारों की रेलकुछ को पहुंचाती हैराजगद्दी परऔर कुछ को पहुंचादेती है सीधा जेल,

राष्ट्र की नारी – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

राष्ट्र की नारी साधारण -सी हूँ नारी भारत माँ की प्यारीराष्ट्र की राज दुलारीगाँधीजी के पदचिन्होंअहिंसा की हूँ पूजारी रश्मिरथी

दुनियादारी की बात- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

दुनियादारी की बात ज्यादातर मेहनती एवं फुर्तीले लोगपसंद नहीं करते अपने आस-पासआलसी और कामचोर लोगों को,कभी उनको डांट डपट करतो

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

मीरा भटक रही हे नाथ परवर दिगार करवाओ अपनी दीदारभक्तों की सुनो पुकारमीरा भटक रही संसार । मायाजाल क्यों बिछायासब

जो सबसे जरूरी है- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

जो सबसे जरूरी है एक दृश्य अक्सर दिख जाता है मुझे अपने आस-पास… चार कंधों पर अपनी आखिरी यात्रा परनिकले

काटब धान – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

काटब धान सखी रे हुलसायल मनमा आयल अगहन महीनमाधान काटी करब पबनियाचूड़ा कुट करब नेमनमा। कुल देवी के चढ़ायब नागुड़

Leave a Comment