Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

कविता-मुस्कान में मिठास की परछाई है/ muskan me mithas ki parchhai hai

कविता-मुस्कान में मिठास की परछाई है मुस्कान में मिठास की परछाई है इस कला में अंधकारों में भी भरपूर खुशहाली …


कविता-मुस्कान में मिठास की परछाई है

मुस्कान में मिठास की परछाई है
इस कला में अंधकारों में भी
भरपूर खुशहाली छाई है
स्वभाव की यह सच्ची कमाई है

मीठी जुबान का ऐसा कमाल है
कड़वा बोलने वाले का
शहद भी नहीं बिकता
मीठा बोलने वाले की
मिर्ची भी बिक जाती है

मुस्कान उस कला का नाम है
भरपूर खुशबू फैलाना उसका काम है
अपने स्वभाव में ढाल के देखो
फिर तुम्हारा नाम ही नाम है

मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं
अटके काम पल भर में पूरे होते हैं
सुखी काया की नींव होते हैं
मानवता का प्रतीक होते हैं

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

बढ़े चलो /badhe chalo

August 8, 2022

बढ़े चलो  भारत के स्वतंत्रता संग्राम की समग्र गाथा, गर्व की अभिव्यक्ति कर युवाओं में देशभक्ति की गहरी भावना पैदा

भारत छोड़ो आंदोलन दिवस 8 अगस्त 2022 पर विशेष

August 8, 2022

भारत छोड़ो आंदोलन दिवस 8 अगस्त 2022 पर विशेष  आओ भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरणा लेकर, खाओगे तो जाओगे जन

तब और अब का अंतर!

August 5, 2022

तब और अब का अंतर! जब नहीं था हमारे पास अलार्म,स्वयं से याद रखते थे सारे काम,ना था मोबाइल फोन

जीवन की यात्रा!

August 5, 2022

जीवन की यात्रा! उम्मीद के दीए को जलाकर,दर्द और तकलीफ को भूलाकर,मुश्किलों को सुलझा कर,हिम्मत को खुद में समाकर,जीते जा

अब भी हिम्मत बाकी है!

August 5, 2022

अब भी हिम्मत बाकी है! मुसीबतों का भंडार है,हर तकलीफ का संहार है,अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,दृढ़ता तेरा

जाने के बाद।

August 5, 2022

जाने के बाद। कुछ हो जाने के बाद,उसके बारे में क्यों सोचना,कुछ खो जाने के बाद,उसे सोच कर क्यों रोना।

Leave a Comment