Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

कविता-मानगढ़ धाम की गौरव गाथा/mangarh dham ki Gaurav yatra

आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम जनजातीय नायकों को याद करने …


आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम जनजातीय नायकों को याद करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें 15 नवंबर (जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती) को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में घोषित करना, समाज में जनजातीय लोगों के योगदान को मान्यता देने और स्वतंत्रता संग्राम में उनके बलिदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए देश भर में जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना करना आदि शामिल हैं। इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम जनजातीय नायकों और शहीदों के बलिदान के लिए उन्हें नमन करने के लिए 1 नवंबर 2022 को राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ हिल में एक सार्वजनिक कार्यक्रम- ‘मानगढ़ धाम की गौरव गाथा’ में भाग लिया। इसपर आधारित यह मेरी स्वयंरचित कविता जनजातीय गौरवगाथा दिवस के उपलक्ष में है।

कविता-मानगढ़ धाम की गौरव गाथा

पीएम ने मानगढ़ धाम की गौरव गाथा में
हिस्सा लिया है।15 नवंबर को अलख जगाया जाएगा
जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा
देशभर में साथ देने का संकल्प किया जाएगा

जनजातीय समुदायों की संस्कृति व विरासत को
संरक्षित उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जा रहा हैं
जनजातीय गौरव दिवस को प्रतिवर्ष मनाने का
संकल्प देशवासियों द्वारा लिया जा रहा हैं

जनजातीय समुदाय की प्राकृतिक कौशलता
को देख बड़े बड़े ज्ञानी हैरान हर्षित हुए
जनजातीय शिल्प मेला प्रदर्शन
सह-बिक्री का आयोजन किया जाएगा

सत्रह राज्यों में यह मेला मनाया जाता रहा है
भारत में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा
दिए गए योगदान को याद किया जा रहा हैं
समूह की उपलब्धियों का गुणगान किया जा रहा है

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

इंसान और शैतान- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

इंसान और शैतान शरीर एक सा ही है,सत्य, स्नेह, शांति और भाईचारे मेंविश्वास रखने वाला‘इंसान’ हो जाता हैऔरझूठ, घृणा, कलह

दोमुंहे सांप- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

दोमुंहे सांप वो लोगजो जहर उगलते हैंसार्वजनिक मंचों पर हर समयदूसरों के लिए,होते होंगे क्या इतने ही जहरीलेअपनी निजी जिंदगी

कितना मुश्किल है गांधी बनना- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

कितना मुश्किल है गांधी बनना कितना आसान है!किसी से नाराज होने परउसके अहित की कामना करना,किसी से अपना मत भिन्न

गणतंत्र मनाओ – गणतंत्र बचाओ-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

गणतंत्र मनाओ – गणतंत्र बचाओ गौरवशाली दिन है यहबड़ी धूमधाम से इसे मनाओ,मायने इसके सही समझकरखत्म होने से इसे बचाओ।लूटतंत्र

आसान रास्ता- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

आसान रास्ता वक्त ज्यादा लगता है,जुनून ज्यादा लगता है,प्रतिभा ज्यादा लगती है,साल दर साल मेहनत करकेएक नया एवं बेहतर इतिहास

वो तैयार बैठी हैं अब- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

वो तैयार बैठी हैं अब लोकतंत्र में…चुनी गईं सरकारेंजनता की आवाज उठाने के लिए,निरंकुश हो,तैयार बैठी हैं अबजनता की ही

Leave a Comment