Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

कविता- माई से- सिद्धार्थ गोरखपुरी

 कविता- माई से हम कितने क़ाबिल है ये कमाई तय करती है। हम हमेशा से क़ाबिल हैं ये बस माई …


 कविता- माई से

कविता- माई से- सिद्धार्थ गोरखपुरी

हम कितने क़ाबिल है

ये कमाई तय करती है।

हम हमेशा से क़ाबिल हैं

ये बस माई तय करती है।

हमारे इज्जत का पैमाना

तय होता है कमाई से।

हमको नाक़ाबिल कहा है

कितने लोगों ने माई से।

हम खुद को लेकर संजीदा हैं

ये किस – किस को बताते चलें।

सभी नासमझ समझते हैं मुझे

हम किस – किस को समझाते चलें।

सभी का मत एक जैसा है

हम किस- किस को दुहाई दें।

हमको नाक़ाबिल कहा है

कितने लोगों ने माई से।

समय बदलते वक्त न लगता

ये अरसे से सुनता आया हूँ।

लोगों के कहे से बेफिक्र होकर

अपनी धुन धुनता आया हूँ।

न जाने कब ऐसा होगा 

कि पीछा छूटेगा तन्हाई से।

हमको नाक़ाबिल कहा है

कितने लोगों ने माई से।

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

Leave a Comment