Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Virendra bahadur

कविता–मनुष्य | manushya par kavita

कविता–मनुष्य मनुष्य रंग बदलता मनुष्य,ढ़ंग बदलता मनुष्य। चाल बदलता मनुष्य, ढ़ाल बदलता मनुष्य। पल में फिरता मनुष्य, पल में विफरता …


कविता–मनुष्य

कविता–मनुष्य | manushya par kavita

मनुष्य रंग बदलता मनुष्य,
ढ़ंग बदलता मनुष्य।
चाल बदलता मनुष्य,
ढ़ाल बदलता मनुष्य।

पल में फिरता मनुष्य,
पल में विफरता मनुष्य।
संग छोड़ता मनुष्य,
व्यंग बोलता मनुष्य।

तंग करता मनुष्य,
दंग करता मनुष्य।
सत्संग करता मनुष्य,
तब भी छल करता मनुष्य।

हालचाल पूछता मनुष्य,
बदहाल करता मनुष्य।
ऊपर उठता मनुष्य,
नीचे गिरता मनुष्य।

हक हड़पता मनुष्य,
लाज लूटता मनुष्य।
स्वार्थ साधता मनुष्य,
नियम लादता मनुष्य।

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336


Related Posts

गुरु गोविंद पुकारा है – डॉ इंदु कुमारी

January 13, 2022

गुरु गोविंद पुकारा है तेग बहादुर सिंह ने अपने बेटे को बलिदान दिया झुका नहीं दुश्मन के आगेमौत को भी

व्याकुल अंतर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 13, 2022

व्याकुल अंतर प्रीत निभाती रात गई बित , जोड़ जोड़ कर सपने-अपने,बंद आंखों में मिलन यामिनी ,हुई भोर तो साथ

कान्हा तू काहे करत मनमानी -सरस्वती मल्लिक

January 13, 2022

कविता : कान्हा तू काहे करत मनमानी कान्हा तू काहे करत मनमानी बार -बार समझाया तुझकोफिर भी एक न मानीनित

प्रेरणा- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

प्रेरणा कहने सुनने में छोटा सा शब्द मगर भाव बड़ा है, किसी की अंधेरे में डूबती जिंदगी मेंउम्मीद की किरण

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 7, 2022

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा

कितनी हैरानी की बात है!- जितेन्द्र ‘कबीर

January 7, 2022

कितनी हैरानी की बात है! कितनी हैरानी की बात हैकि भौतिक जीवन की सार हीनता औरमृत्यु को सहज भाव से

Leave a Comment