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कविता–मनुष्य | manushya par kavita

कविता–मनुष्य मनुष्य रंग बदलता मनुष्य,ढ़ंग बदलता मनुष्य। चाल बदलता मनुष्य, ढ़ाल बदलता मनुष्य। पल में फिरता मनुष्य, पल में विफरता …


कविता–मनुष्य

कविता–मनुष्य | manushya par kavita

मनुष्य रंग बदलता मनुष्य,
ढ़ंग बदलता मनुष्य।
चाल बदलता मनुष्य,
ढ़ाल बदलता मनुष्य।

पल में फिरता मनुष्य,
पल में विफरता मनुष्य।
संग छोड़ता मनुष्य,
व्यंग बोलता मनुष्य।

तंग करता मनुष्य,
दंग करता मनुष्य।
सत्संग करता मनुष्य,
तब भी छल करता मनुष्य।

हालचाल पूछता मनुष्य,
बदहाल करता मनुष्य।
ऊपर उठता मनुष्य,
नीचे गिरता मनुष्य।

हक हड़पता मनुष्य,
लाज लूटता मनुष्य।
स्वार्थ साधता मनुष्य,
नियम लादता मनुष्य।

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336


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