Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Rakesh madhur

कविता -भारतीयता के भाव और कट्टरता

भारतीयता के भाव और कट्टरता  कट्टरता का भाव गलत है,मेल न खाता भारत से।। जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ …


भारतीयता के भाव और कट्टरता 

कविता -भारतीयता के भाव और कट्टरता
कट्टरता का भाव गलत है,मेल न खाता भारत से।।
जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ अनागत से।।
कट्टरता ने जख्म दिए वो,आज तलक जो भर न सके।।
हृदय वेदना खुलकर भारत,हाय कभी हम लिख न सके।।
जिन्हें प्यार अपने भारत से,वो सारे जन आहत से।।१।। 
जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ अनागत से।।
मिलकर रहना जिन्हें न आता,उनपर अब सख्ती करिए।।
कट्टरता की धरा तोड़ कर, भाव नम्रता के भरिए।।
देशप्रेम के लिए जियो अब,बाज आइए आदत से।।२।।
जाग-जाग ओ सोये भारत ये खिलबाड़ अनागत से।।
जिसका लेकर नाम रहे लड़, उसे धर्म का देते नाम।।
किसे धर्म कहते हैं सज्जन,समझ बाद में कर संग्राम।।
धर्म प्यारका भाव जगाता,जन मानस के स्वागत से।।३।।
जाग-जाग ओ सोये भारत,ये खिलबाड़ अनागत से।।
सत्य अहिंसा भाव जहां का,वहां न नफरत का स्थान।।
मांस काटकर अपने तन का, जहां किया लोगों ने दान।।
ऐसे भारत में कट्टरता,आफत हुई इबादत पे।।४।।
जाग-जाग ओ सोये भारत ये खिलबाड़ अनागत।।

About author 

Madhukavi Rakesh madhur

मधुकवि राकेश मधुर

गांव-चाबरखास
तहसील–तिलहर
जनपद-शाहजहांपुर यू पी

Related Posts

दिल ढूँढता है-नंदिनी लहेजा

March 25, 2022

दिल ढूँढता है कहाँ गए बचपन के वो दिन,जो निश्चिंतता में गुजरते थे।ना लोभ था,ना कोई कपट,निश्छलता लिए रहते थे।दिल

कवि का ह्रदय है – नंदिनी लहेजा

March 25, 2022

शीर्षक-कवि का ह्रदय है  कवि का ह्रदय है खजाना विचारों का , कविता हैं उसकी कुंजी।हँसाते, रुलाते,कभी दिल को छू

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं न यह जीत आखिरी हैऔर न यह हार आखिरी है,रोजाना का संघर्ष है जीवनचलेगा

पाखंड लगता है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

March 25, 2022

पाखंड लगता है एक विजेता!अपने सारे संसाधनझोंक देता हैयुद्ध के मैदान मेंजीत के लिए,विजय उसका चरित्र हैलेकिनजब वो लगाता है

हालात बदलेंगे क्या?- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

हालात बदलेंगे क्या? आज जब नारे बुलंद होंगेदुनिया भर मेंमहिलाओं की सुरक्षा के,बहुत सारी महिलाएं संघर्ष कर रही होंगीहवस के

कोई रंग ऐसा बरस जाए- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

कोई रंग ऐसा बरस जाए इस बार होली में कोई रंग आसमां सेऐसा बरस जाए,कि बस इंसानियत के रंग में

Leave a Comment