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कविता -भारतीयता के भाव और कट्टरता

भारतीयता के भाव और कट्टरता  कट्टरता का भाव गलत है,मेल न खाता भारत से।। जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ …


भारतीयता के भाव और कट्टरता 

कविता -भारतीयता के भाव और कट्टरता
कट्टरता का भाव गलत है,मेल न खाता भारत से।।
जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ अनागत से।।
कट्टरता ने जख्म दिए वो,आज तलक जो भर न सके।।
हृदय वेदना खुलकर भारत,हाय कभी हम लिख न सके।।
जिन्हें प्यार अपने भारत से,वो सारे जन आहत से।।१।। 
जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ अनागत से।।
मिलकर रहना जिन्हें न आता,उनपर अब सख्ती करिए।।
कट्टरता की धरा तोड़ कर, भाव नम्रता के भरिए।।
देशप्रेम के लिए जियो अब,बाज आइए आदत से।।२।।
जाग-जाग ओ सोये भारत ये खिलबाड़ अनागत से।।
जिसका लेकर नाम रहे लड़, उसे धर्म का देते नाम।।
किसे धर्म कहते हैं सज्जन,समझ बाद में कर संग्राम।।
धर्म प्यारका भाव जगाता,जन मानस के स्वागत से।।३।।
जाग-जाग ओ सोये भारत,ये खिलबाड़ अनागत से।।
सत्य अहिंसा भाव जहां का,वहां न नफरत का स्थान।।
मांस काटकर अपने तन का, जहां किया लोगों ने दान।।
ऐसे भारत में कट्टरता,आफत हुई इबादत पे।।४।।
जाग-जाग ओ सोये भारत ये खिलबाड़ अनागत।।

About author 

Madhukavi Rakesh madhur

मधुकवि राकेश मधुर

गांव-चाबरखास
तहसील–तिलहर
जनपद-शाहजहांपुर यू पी

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