Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

कविता – पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा

कविता – पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा । पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा । देख कर …


कविता – पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा ।

kavita pehle jaisa nahi raha gaon aaj  mera
पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा ।

देख कर माहौल उतर जाता है चेहरा ।

देता नहीं कोई अब तो रोटी गाय को ,
दूध – दही छोड़कर पियें सब चाय को ।

चींटियों के बिल पर आटा नहीं डालते ,
छोड़कर गाय भैंस अब कुते हैं पालते ।

काट डाले पीपल, बरगद और जाल ,
सुख गया जोहड़ और सूखा पड़ा ताल ।

मिलती नहीं रस्ते में कहीं भी ठंडी छांव ,
क्रिकेट में मशगूल भूले कुश्ती के दांव ।

हैं खेत – खलिहान सूने, नाचता नहीं मोर ,
चिड़ियां नहीं चहकती, अब होती जब भोर ।

सावन के झूले गये , गया फागुन का फ़ाग ,
डी .जे के शौक में भूल गए रागिनी व राग ।

भाई के भी भाई आज नहीं बैठता पास ,
इस राजनीति ने किया भाईचारे का नाश ।

मंदिर के सामने बिकती है अब तो शराब ,
विद्यालय और अस्पताल की दशा है खराब ।

पीकर शराब करते हैं अब शराबी हुड़दंग ,
सुखचैन मेरे गांव का हो गया है भंग ।

थाने और कचेहरी में नित जा रहे हैं केश ,
दीन – हीन और शरीफ यहां भोगते क्लेश ।

बेरोजगारों की तो यहां घूमती है अब फ़ौज ,
शराब , सुल्फा पीने में समझे अपनी मौज ।

ताऊ -ताई , चाचा – चाची रिश्ते खो गए ,
अंकल और आंटी ही अब सारे हो गए ।

टा-टा , हेलो , हाय गुडबाय अब आ गई ,
नमस्ते की जगह ये ही मन को भा गई ।

बड़े – बूढ़ों का अब यहां रहा नहीं मान ,
कहे पंवार बचाले मेरे गाँव को भगवान ।

कवि – समुन्द्र सिंह पंवार
रोहतक , हरियाणा


Related Posts

swapn kavita by Arun kumar shukla

July 18, 2021

शीर्षक-स्वप्न लोग कहते जिंदगी का है सफर छोटा,जानकर के भी मगर मैं भूल जाता हूं।जिस समय मैं सोचता बेचैन रहता

Rishta apna by Dr hare Krishna Mishra

July 18, 2021

 रिश्ता अपना अर्धांगिनी उत्तराधिकारिनी , मेरे जीवन की कामिनी , बहती आई अंतस्थल में , पावन निर्मल गंगा जैसी  ।।

gazal by rinki singh sahiba

July 18, 2021

ग़ज़ल  सौ बार उससे लड़ के भी हर बार हारना, बाज़ी हो इश्क़ की तो मेरे यार हारना। उससे शिकस्त

Acche insan ki pahchan by Jitendra kabir

July 17, 2021

 अच्छे इंसान की पहचान खुद के लिए हो अच्छा सबसे पहले एक इंसान, हो सके जहां तक रखे अपने शरीर

Najar najar ka antar by Jitendra kabir

July 17, 2021

 नजर नजर का अंतर भ्रष्टाचार जो हमारी नजर में है, उससे पैसा बनाने वालों की नजरों में रोजगार है। मंहगाई

Duniya dikhawa pasand hai by Jitendra kabir

July 16, 2021

 दुनिया दिखावा पसंद है कितना भी बड़ा और दयालू  मन हो तुम्हारा, चाहे गुमनाम रहकर कर लो  तुम जरूरतमंदों का

Leave a Comment