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कविता : न देना दिल किसी को -सरस्वती मल्लिक

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 कविता : न देना दिल किसी को 

कविता : न देना दिल किसी को  -सरस्वती मल्लिक

न देना दिल किसी को , न लगाना दिल किसी से , 

छीन लेते हैं लोग चैन दिल में आकर , 

दूर रखना सभी को अपने दिल के घर से । 

आएंगे लोग दिल लेने को तुमसे , 

करेंगे बहुत जतन , दिल चुराने को तुमसे , 

आना न उनकी बातों में कभी भी , 

रखना बचाके अपने दिल को उनसे । 

मिलाना न नजरें भूल कर भी किसी से , 

पहुँचता है दिल तक , 

कोई इसी रस्ते से , 

लगे जो चोट टूट जाएगा , 

है ये दिल शीशे के जैसे । 

खोना न कभी अपने दिल को , 

ले न जा पाए कोई इसे धोखे से , 

गया जो एक बार दिल , मिलेगा न दुबारा वो कभी फिर से , 

कीमत न इसकी कोई  , महफूज रखना सभी से । 

न देना दिल किसी को न लगाना दिल किसी से ॥

❤ ❤ ❤ ❤ ❤ 

मौलिक एवं स्वरचित 
-सरस्वती मल्लिक  (Saraswati mallick)
मधुबनी , बिहार


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