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कविता-नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

नई शुरुआत! सब बिखर गया तो क्या हुआ,समेटने का दम रखते हैं,चलो करे नई शुरुआत,जिंदगी में फिर से नई शुरूवात …


नई शुरुआत!

कविता-नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

सब बिखर गया तो क्या हुआ,
समेटने का दम रखते हैं,
चलो करे नई शुरुआत,
जिंदगी में फिर से नई शुरूवात कर सकते हैं!

सब खो दिया तो क्या हुआ,
फिर बनाने का दम रखते हे,
चलो करे नई शुरुआत,
जिंदगी में फिर से नई शुरूवात कर सकते हैं!

दर्द बहुत आगया जिंदगी में तो क्या हुआ,
मुस्कुराने का दम रखते हे,
चलो करे नई शुरुआत,
जिंदगी में फिर से नई शुरूवात कर सकते हैं!

अँधेरा ही अंधेरा हर तरफ हो गया तो क्या हुआ,
रोशनी लाने का दम रखते हे,
चलो करे नई शुरुआत,
जिंदगी में फिर से नई शुरूवात कर सकते हैं!
चलो करे नई शुरुआत,
जिंदगी में फिर से नई शुरूवात कर सकते हैं!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


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