Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Prem Thakker

कविता तुम्हारा इंतज़ार | kavita tumhara intezar

तुम्हारा इंतज़ार सुनो दिकु… तुम्हारे इश्क में टूटकर बिखर रहा हूँमें आज भी तुम्हारे इंतज़ार में जी रहा हूँ कभी …


तुम्हारा इंतज़ार

कविता तुम्हारा इंतज़ार | kavita tumhara intezar

सुनो दिकु…

तुम्हारे इश्क में टूटकर बिखर रहा हूँ
में आज भी तुम्हारे इंतज़ार में जी रहा हूँ

कभी इस जीवन में वीरानपन
तो कभी आखों में समंदर का पानी पी रहा हूँ
में आज भी तुम्हारे इंतज़ार में जी रहा हूँ

तुम तक एकबार मेरी बात पहुँचाने की ख्वाइश है
में कोई बड़ी सख्शियत को नहीं जानता
मेरे पास तो मेरा परिश्रम ही मेरी गुंजाइश है

हज़ारों चोटें खाकर
खुद के दर्दो को
तुम्हारी यादों के सहारे-सी रहा हूँ
में आज भी तुम्हारे इंतज़ार में जी रहा हूँ

एक दिन तो ज़रूर आएगा
जो दिकुप्रेम के रिश्ते की किस्मत चमकाएगा
खुद को ठोकर देकर भी अपने इरादों की मज़बूती कर रहा हूँ

सुनो दिकु
में आज भी तुम्हारे इंतज़ार में जी रहा हूँ

प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए

About author

प्रेम ठक्कर | prem thakker

प्रेम ठक्कर
सूरत ,गुजरात 

ऐमेज़ॉन में मैनेजर के पद पर कार्यरत  

Related Posts

कविता -गँवईयत अच्छी लगी

June 23, 2022

 कविता -गँवईयत अच्छी लगी सिद्धार्थ गोरखपुरी माँ को न शहर अच्छा लगा न न शहर की शहरियत अच्छी लगी वो

कविता – बचपन पुराना रे

June 23, 2022

 कविता – बचपन पुराना रे सिद्धार्थ गोरखपुरी ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

June 23, 2022

 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता? सिद्धार्थ गोरखपुरी झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

रक्त की बूँद!!!!

June 23, 2022

 रक्त की बूँद!!!! अनिता शर्मा रक्त की हर बूंद कीमती,रक्तदान जरूरी है।कीमती हर जान रक्त से,रक्त दान जरूरी है। समय-समय

“श्रृंगार रस”

June 22, 2022

 “श्रृंगार रस” वो लम्हा किसी नाज़नीन के शृंगार सा बेइन्तहाँ आकर्षक होता है, जब कोई सनम अपने महबूब की बाँहों

खालसा-हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’

June 5, 2022

 खालसा अंतर्मन में नाद उठा है  कैसा ये विस्माद उठा है  हिरण्य कश्यप के घर देखो  हरी भक्त प्रह्लाद उठा

PreviousNext

Leave a Comment