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कविता-तब से आदमी भी पेंड़ होना चाहता है ..!

 कविता-तब से आदमी भी पेंड़ होना चाहता है ..!  Pic credit -freepik.com मैं उस हरकारे के बच्चों को भी उसी …


 कविता-तब से आदमी भी पेंड़ होना चाहता है ..! 

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Pic credit -freepik.com

मैं उस हरकारे के बच्चों को भी उसी
समय से देख रहा था
जिस समय से मैं उस बरगद 
के पेंड़ को देखा करता था
पेंड़ के आसपास और भी लत्तरें
थींं l
पेंड़ की फुनगियों के बीच से 
कई कोंपलें फूटीं और 
पेंड़ की कोपलों ने धीरे – धीरे 
धीरे बड़ा होना शुरू किया l 
हरकारे के चार बच्चे थें l 
हरकारे के बच्चे जमींदारों
के यहाँ काम करते थें 
मैं देख रहा था  पेंड़ को और 
उसके साथ खिले कोंपलों 
को बढ़ते l
हरकारे के बच्चों और 
पेंड़ को मैनें इंच-इंच बढ़ते 
देखा ..
इस बीच पेंड़ के आसपास 
का समय भी बीतता रहा l 
कोंपलें भी धीरे-धीरे लत्तरों में बदलीं
फिर लतरें तना बन गईं..!
और , पेंड़ के आस-पास खड़े
हो गये वो 
पेंड़ के रक्षार्थ..!
साथ- साथ जन्मी और भी कोंपलें 
पहले लत्तर बनीं फिर तना 
और फिर हरकारे के बच्चों की तरह
वो भी फैल गईं 
अनंत दिशाओं में ..! 
लत्तरों , ने बारिश झेला , धूप भी
लत्तरें , ठिठुरती रहीं ठंड में 
तब भी साथ – साथ थीं l
 सुख – दु:ख साथ – साथ महसूसा !
लत्तरों ने वसंत देखा पतझड़ भी !
बड़े होने के बाद हरकारे के बच्चों 
ने कभी नहीं पूछा अपने सगे भाइयों
से उनका हाल ! 
 भाईयों ने फिर कभी आँगन 
में  साथ बैठकर घूप या गर्मी पर 
बात नहीं की ..
समय बीतता रहा 
ऋतुएँ , बदलती रहीं 
लेकिन , हरकारे के लड़के दु:ख भी अकेले
पी गये ..दु:ख भी नहीं बाँटा किसी से ..! 
सालों से कभी साथ बैठकर 
किसी समस्या का सामाधान 
वो  खोज नहीं पाये l
फिर , साथ बैठकर कभी नहीं देख पाये 
भोर होने के बाद ओस  में नहाई हुई   फसल ! 
या सुबह की कोई उजास ..
पता नहीं कितने साल बीत गये l 
जब गाँव में  काम मिलना बँद हो गया 
फिर , वो कहीं कमाने चले गये
दिल्ली या पँजाब ..
बूढ़ा हरकारा जब मरा तो दाह संस्कार
भी गाँव के लोगों ने किया ! 
हरकारे के लड़कों ने फिर  कभी 
पलटकर  नहीं देखा गाँव ! 
हरकारे की मौत से दु:खी होकर
बूढ़ा होता मकान भी एक दिन
 ढह कर गिर  गया  l 
लेकिन , तब भी हरकारे के लड़के 
नहीं लौटे .. !
लेकिन , बूढ़े पेंड़ की हिफाजत में
आज भी खड़े थें युवा पेंड़..! 
पेंड़ अब अपनी दहलीज की 
झिलंगी खाट पर 
पड़ा रहता l 
बूढ़ा , पेंड चिलम भरकर 
पीता .. शेखी बघारता गाँव में 
कि उसकी डयोढ़ी ..बहुत मजबूत हैं ..! 
और कि , वो युवा पेंड़ों की हिफाजत में है ..!
तब से आदमी भी पेंड़ होना चाहता है !
सर्वाधिकार सुरक्षित
 महेश कुमार केशरी 

About author 

Mahesh kumar Keshari
परिचय – 
नाम – महेश कुमार केशरी
जन्म -6 -11 -1982 ( बलिया, उ. प्र.) 
शिक्षा – 1-विकास में श्रमिक में प्रमाण पत्र (सी. एल. डी. , इग्नू से) 
2- इतिहास में स्नातक ( इग्नू से) 
3- दर्शन शास्त्र में स्नातक ( विनोबा भावे वि. वि. से) 
अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन – सेतु आनलाईन पत्रिका (पिटसबर्ग अमेरिका से प्रकाशित) .
राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन- वागर्थ , पाखी , कथाक्रम, कथाबिंब , विभोम – स्वर , परिंदे , गाँव के लोग , हिमप्रस्थ , किस्सा , पुरवाई, अभिदेशक, , हस्ताक्षर , मुक्तांचल , शब्दिता , संकल्य , मुद्राराक्षस उवाच , पुष्पगंधा , 
अंतिम जन , प्राची , हरिगंधा, नेपथ्य, एक नई सुबह, एक और अंतरीप , दुनिया इन दिनों , रचना उत्सव, स्पर्श , सोच – विचार, व्यंग्य – यात्रा, समय-सुरभि- अनंत, ककसार, अभिनव प्रयास, सुखनवर , समकालीन स्पंदन, साहित्य समीर दस्तक, , विश्वगाथा, स्पंदन, अनिश, साहित्य सुषमा, प्रणाम- पर्यटन , हॉटलाइन, चाणक्य वार्ता, दलित दस्तक , सुगंध, 
नवनिकष, कविकुंभ, वीणा, यथावत , हिंदुस्तानी जबान, आलोकपर्व , साहित्य सरस्वती, युद्धरत आम आदमी , सरस्वती सुमन, संगिनी,समकालीन त्रिवेणी, मधुराक्षर, प्रेरणा अंशु , तेजस, दि – अंडरलाईन,शुभ तारिक , मुस्कान एक एहसास, सुबह की धूप, आत्मदृष्टि , हाशिये की आवाज, परिवर्तन , युवा सृजन, अक्षर वार्ता , सहचर , युवा -दृष्टि , संपर्क भाषा भारती , दृष्टिपात, नव साहित्य त्रिवेणी , नवकिरण , अरण्य वाणी, अमर उजाला, पंजाब केसरी , प्रभात खबर , राँची एक्स्प्रेस , दैनिक सवेरा , लोकमत समाचार , दैनिक जनवाणी , सच बेधड़क , डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट , नेशनल एक्स्प्रेस, इंदौर समाचार , युग जागरण, शार्प- रिपोर्टर, प्रखर गूंज साहित्यनामा, कमेरी दुनिया, आश्वसत के अलावे अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित . 
 चयन – (1 )प्रतिलिपि कथा – प्रतियोगिता 2020 में टाॅप 10 में कहानी ” गिरफ्त ” का चयन  
(2 ) पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार ( कविता संकलन )
जब जँगल नहीं बचेंगे ( कविता संकलन ), मुआवजा ( कहानी संकलन ) 
(3)संपादन – प्रभुदयाल बंजारे के कविता संकलन ” उनका जुर्म ” का संपादन..
(4)-( www.boltizindgi.com) वेबसाइट पर कविताओं का प्रकाशन
(5) शब्द संयोजन पत्रिका में कविता ” पिता के हाथ की रेखाएँ “
 का हिंदी से नेपाली भाषा में अनुवाद सुमी लोहानी जी द्वारा और ” शब्द संयोजन ” पत्रिका में प्रकाशन आसार-2021 अंक में.
(6) चयन – साझा काव्य संकलन ” इक्कीस अलबेले कवियों की कविताएँ ” में इक्कीस कविताएँ चयनित
(7) श्री सुधीर शर्मा जी द्वारा संपादित ” हम बीस ” लघुकथाओं के साझा लघुकथा संकलन में तीन लघुकथाएँ प्रकाशित 
(8) सृजनलोक प्रकाशन के द्वारा प्रकाशित और संतोष श्रेयंस द्वारा संपादित साझा कविता संकलन ” मेरे पिता” में कविता प्रकाशित 
(9) डेली मिलाप समाचार पत्र ( हैदराबाद से प्रकाशित) दीपावली प्रतियोगिता -2021 में ” आओ मिलकर दीप जलायें ” कविता पुरस्कृत
(10) शहर परिक्रमा – पत्रिका फरवरी 2022- लघुकथा प्रतियोगिता में लघुकथा – ” रावण” को प्रथम पुरस्कार
(11) कथारंग – वार्षिकी -2022-23 में कहानी ” अंतिम बार ” 
प्रकाशित
(12)व्यंग्य वार्षिकी -2022 में व्यंग्य प्रकाशित 
(13) कुछ लघुकथाओं और व्यंग्य का पंजाबी , उड़िया भाषा में अनुवाद और प्रकाशन 
(14)17-07-2022 – वर्ल्ड पंजाबी टाइम्स चैनल द्वारा लिया गया साक्षात्कार 
(15) पुरस्कार – सम्मान – नव साहित्य त्रिवेणी के द्वारा – अंर्तराष्ट्रीय हिंदी दिवस सम्मान -2021
संप्रति – स्वतंत्र लेखन एवं व्यवसाय
संपर्क- श्री बालाजी स्पोर्ट्स सेंटर, मेघदूत मार्केट फुसरो, बोकारो झारखंड -829144


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