Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

कविता-डिजिटल युग का नया डॉक्टर

कविता-डिजिटल युग का नया डॉक्टर चिंतक कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र आजकल कृत्रिम बुद्धिमता की लहर छाई है …


कविता-डिजिटल युग का नया डॉक्टर

चिंतक कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
चिंतक कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

आजकल कृत्रिम बुद्धिमता की लहर छाई है
हर काम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भावना समाई है
मानवीय दिनचर्या चलाने में आलस्यता आई है
इसलिए मानव ने यह तरकीब अपनाई है

डिजिटल युग में ऐप से इलाज के जरिए
डिजिटल डॉक्टर की टेक्नोलॉजी आई है
सिर्फ एक टच से बीमारी का इलाज होगा
ऐसी ऐसी ऐप्स सॉफ्टवेयर भी आई है

परंपरागत संसाधनों की परंपरा भुलाई है
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपार सफलता पाई है
इसलिए डिजिटल युग की परिकल्पना आई है
सूरजचांदअदालतों में कृत्रिम बुद्धिमता अपनाई है

मानव ने जो यह संकल्पता दर्शाई है
सारी प्रकृति को कृत्रिम करने की इच्छा जताई है
ऊपर वाले का अस्तित्व है यह बात भुलाई है
हे मानव!! उसी के बल पर यह बुद्धिमता पाई है

लेखक – कर विशेषज्ञ, स्तंभकार साहित्यकार, कानूनी लेखक, चिंतक कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

भारतीय संस्कृति के विविध रंगों और आध्यात्मिक शक्ति का आकर्षण

August 13, 2023

हमारे देश में कला की सबसे प्राचीन और सबसे श्रेष्ठ परिभाषाएं व परंपराएं विकसित हुई हैं वैश्विक स्तरपर भारतीय संस्कृति

चीन पर प्रतिबंधों का ज़बरदस्त प्रहार

August 13, 2023

भारत अमेरिका मिलकर ड्रैगन को दे रहे झटके पे झटका ! भारत ने ड्रैगन पर लैपटॉप टेबलेट तो अमेरिका ने

सेलिब्रिटीज सावधान ! विज्ञापन की नई गाइडलाइंस 2023 ज़ारी

August 11, 2023

सेलिब्रिटीज सावधान ! विज्ञापन की नई गाइडलाइंस 2023 ज़ारी Image credit -Google  स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती उत्पादों के विज्ञापनों संबंधी केंद्र

मोम सा दिल | mom sa dil

August 11, 2023

मोम सा दिल सुनो दिकु……चोटें तो बहोत लगी इस सफर मेंपर दर्द का कभी एहसास ना हुआ चाहनेवाले बहोत मिले

मैं मणिपुर हूं | main Manipur hun kavita

August 11, 2023

मैं मणिपुर हूं सुन सको तो सुनो, दिल को मजबूत कर, दास्तां अपने ग़म की बताता हूं मैं,मैं मणिपुर हूं,

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई

August 11, 2023

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई दर्द-ए चीख मेरी, मेरे ही भीतर तोड़ मुझे घुटके रह गईनकाब हंसी

PreviousNext

Leave a Comment