Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, uday raj Verma

कविता -गर्मी

गर्मी बेवफाई की चांद नेचांद को तो कुछ कह नहीं पाए लेकिन मोहब्बत इतनी थीको उसे भूला भी न पाए …


गर्मी

उदय राज वर्मा उदय छिटेपुर सैंठा गौरीगंज अमेठी उत्तर प्रदेश
बेवफाई की चांद ने
चांद को तो कुछ कह नहीं पाए
लेकिन मोहब्बत इतनी थी
को उसे भूला भी न पाए
चले आए हमें गुस्सा दिखाने
राहें तुम्हारी इंदु ने बदली और
और गर्मी हमें दिखा रहे हैं
सूरज बाबा आप बुजुर्ग हो गए हो
अब आप इश्क मोहब्बत में जलते रहें
ये अच्छा नहीं लगता।

मौलिक अप्रकाशित
उदय राज वर्मा उदय
छिटेपुर सैंठा गौरीगंज अमेठी उत्तर प्रदेश 227409


Related Posts

रुकना तो कायरो का काम है!-डॉ. माध्वी बोरसे

December 22, 2021

रुकना तो कायरो का काम है! चलते जाए चलते जाए, यही तो जिंदगी का नाम है,आगे आगे बढ़ते जाए,रुकना तो

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

December 22, 2021

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु

चिंतन के क्षण- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

चिंतन के क्षण रोम रोम में बसी है यादें,बचा नहीं कुछ अपना है,तेरे मेरे अपने सारे सपने,बिखर गए सारे के

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 22, 2021

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी आजकल लोगों कोघर का काम करने के लिएईमानदार और मेहनती लोग नहीं मिलते,जमीन का

रूठे यार को मनाऊं कैसे-अंकुर सिंह

December 21, 2021

रूठे यार को मनाऊं कैसे रूठे को मैं कैसे मनाऊं, होती जिनसे बात नहीं,यादों में मैं उनके तड़पूउनको मेरा ख्याल

संवेदना- डॉ इंदु कुमारी

December 21, 2021

संवेदना मानव हम कहलाते हैं क्या हमने अंतस् मेंकभी झांककर देखा हैस्वार्थ में सदा जीते रहेपर पीड़ा कभी देखा हैअगर

Leave a Comment