Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Garima-Khandelwal, poem

कविता –उम्मीद | kavita -ummid

उम्मीद  जीवन की राह मेंएक युद्ध सा लड़ता जाता हूं उम्मीद बहुत ज्यादा की मुझे हाथ में कुछ नही पाता …


उम्मीद 

जीवन की राह में
एक युद्ध सा लड़ता जाता हूं
उम्मीद बहुत ज्यादा की मुझे
हाथ में कुछ नही पाता हूं
 
उम्मीदें सपनो के साथ
पाने की ललग जगाती है
आशा मनवांछित फल पाने को
आखों में घमंड भर जाती है
 
रेगिस्तान की सूखी मिट्टी से
नदियां का पानी चाहता हूं
उम्मीदें निर्जीव पत्थर से
प्रार्थना स्वीकृति चाहता हूं
 
भूखे व्यक्ति के भीतर
रोटी से प्रेम जग जाता है
नेह में सूखा इंसान कहा
इस जग में पानी पाता है
 
उम्मीदें चुप हो जाने से
आशा की आग बुझ जाती है
ज्वाला जब रंगत बदल पड़े
नदियां नग में खो जाती है

About author 

Garima-Khandelwal
गरिमा खंडेलवाल
उदयपुर


Related Posts

रामराज्य लाते हैं | ramrajya laate hai

January 21, 2024

रामराज्य लाते हैं आओ सनातनियों हम सब मिल-जुल कर, एक बार फिर से भारत में रामराज्य लाते हैं। ऊंच-नीच, अमीरी-गरीबी,

नववर्ष-2024 | kavita navvarsh-2024

January 2, 2024

नववर्ष-2024 सुनो दिकु….. इस नववर्ष में लौट आनातुम्हारी यादों से यह दिल को अब और ना बहलाना बातें बहुत-सी हो

दिकुप्रेम | dikuprem

December 31, 2023

दिकुप्रेम सुनो दिकु… में ठीक हूँतुम अपना ख्याल रखनामेरी फिक्र में मत रहना कोई भी आये परेशानी अगरहौंसला रखना खुद

तुम और मैं | Tum aur main

December 30, 2023

 तुम और मैं तुम घुमाते बल्ला क्रिकेट के,मैं घुमाती कंघी बालों में  तुम बात करते किताबों से, मैं बनाती बातें

कविता तुम्हारा इंतज़ार | kavita tumhara intezar

December 30, 2023

तुम्हारा इंतज़ार सुनो दिकु… तुम्हारे इश्क में टूटकर बिखर रहा हूँमें आज भी तुम्हारे इंतज़ार में जी रहा हूँ कभी

आपकी तारीफ के लिए अल्फाज नही

December 30, 2023

 आपकी तारीफ के लिए अल्फाज नही तेरी सूरत,और तासीर,की अल्फाज बया करे,तुम फूल हो गुलाब का ये मौसम बया करे।।फैले

PreviousNext

Leave a Comment