Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Garima-Khandelwal, poem

कविता –उम्मीद | kavita -ummid

उम्मीद  जीवन की राह मेंएक युद्ध सा लड़ता जाता हूं उम्मीद बहुत ज्यादा की मुझे हाथ में कुछ नही पाता …


उम्मीद 

जीवन की राह में
एक युद्ध सा लड़ता जाता हूं
उम्मीद बहुत ज्यादा की मुझे
हाथ में कुछ नही पाता हूं
 
उम्मीदें सपनो के साथ
पाने की ललग जगाती है
आशा मनवांछित फल पाने को
आखों में घमंड भर जाती है
 
रेगिस्तान की सूखी मिट्टी से
नदियां का पानी चाहता हूं
उम्मीदें निर्जीव पत्थर से
प्रार्थना स्वीकृति चाहता हूं
 
भूखे व्यक्ति के भीतर
रोटी से प्रेम जग जाता है
नेह में सूखा इंसान कहा
इस जग में पानी पाता है
 
उम्मीदें चुप हो जाने से
आशा की आग बुझ जाती है
ज्वाला जब रंगत बदल पड़े
नदियां नग में खो जाती है

About author 

Garima-Khandelwal
गरिमा खंडेलवाल
उदयपुर


Related Posts

हाजिर जवाबी अटल बिहारी- डॉ. इन्दु कुमारी

December 27, 2021

हाजिर जवाबी अटल बिहारी देश की माटी ने दी सदाअमूल्य तोहफ़ा निशानीवीरता के परचम कोलहराते रहे हैं बलिदानी उन्हीं श्रेणी

रणछोड़ – डॉ. इन्दु कुमारी

December 27, 2021

शीर्षक -रणछोड़ जिस बातों की है वियोगछोड़ कर भागा रणछोड़ढूँढती है नैना तुझकोभूल गए सलोने मुझको वेदना हमें मिले उपहारक्या

बिकते – बहकते वोटर- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

बिकते – बहकते वोटर लोकतंत्र में… वोट के अधिकार के लिएकिसी योग्यता या मेहनत कीजरूरत नहीं पड़ती,बस पैदा होना ही

नंबर आएगा सभी का- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

नंबर आएगा सभी का कत्ल नहीं हुआ अब तक हमारा धर्म मानने वालों में से किसी का,हमारी जाति में से

कोई कुछ साथ न ले जा पाया- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

कोई कुछ साथ न ले जा पाया रिश्वतें देकर रुपयों-पैसों,कीमती धातुओं, हीरे-जवाहरात की,दिन-रात स्तुति गान में रमे रहकर,सौदे बहुत किये

साड़ी- सुधीर श्रीवास्तव

December 27, 2021

साड़ी साड़ी सिर्फ़ परिधान नहींस्त्री गौरव की भी शान हैसाड़ी विश्व में भारतीय नारियों कामान सम्मान स्वाभिमान है। साड़ी में

Leave a Comment