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कविता-आपनो राजस्थान!

 आपनो राजस्थान! रेतीली मरुस्थलीय भूमि,ऊंट पर बैठकर सवारी, जीवंत संस्कृति,जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है विशिष्ट पहचानम्हारों रंगीलों …


 आपनो राजस्थान!

डॉ. माध्वी बोरसे!

रेतीली मरुस्थलीय भूमि,
ऊंट पर बैठकर सवारी, जीवंत संस्कृति,
जब ये यादे मानस पटल पर आती,
रखता है विशिष्ट पहचान
म्हारों रंगीलों राजस्थान!!।

अतिथि सत्कार, हिर्दय से किया जाता,
ऐतिहासिक परम्पराओं के कारण सम्रद्ध दिखाई देता,
शिल्प कला, स्थापत्य एवं चित्रकला इसकी विशेषता,
पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता!

उदयपुर की झीले, जयपुर के महल,
बिकानेर का मरुस्थलीय भाग और जोधपुर जैसलमेर ,
राजस्थान की हरी भरी भोगोलिक छटाए,
मूर्ति कला, रंगाई छपाई कशीदाकारी एवं अनेक कलाएं!

राज्य के लोगों का पहनावा अपने आप में खास,
अनेक यात्री करते हैं, दूर-दूर से प्रवास,
राजस्थान, भारत के सर्वाधिक सुंदर राज्यों में से एक,
सौंदर्य से भरे हे पर्वत, माउंट आबू और मीठे पाने के लेक!


कैसे किया जाए इस आकर्षित राज्य का बखान,
कभी पधारो मारो राजस्थान,
कण कण वीरता की पहचान,
रजवाड़ों सी यहां है शान!

बाजरे की रोटी, सांग्री रो साग,
दाल बाटी चूरमा, संगीत और राग,
घूमर, कालबेलिया, रेगिस्तान की चादर,
यहां सबके हृदय में है वीरता, प्रेम, सत्कार और आदर!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


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