Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र ‘कबीर’

करे कोई और भरे को खूब मुनाफा कमायाजिन लोगों नेअंधाधुंध खनन करकेनदियों और पहाड़ों में,इसके कारण हुएप्रकृति के कोप से …


करे कोई और भरे को

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र 'कबीर'

खूब मुनाफा कमाया
जिन लोगों ने
अंधाधुंध खनन करके
नदियों और पहाड़ों में,
इसके कारण हुए
प्रकृति के कोप से वो तो
सुरक्षित रहे बहुधा
दूर शहर के अपने मकानों में,
झेला हर बार
उन लोगों ने आपदाओं को
अपने ऊपर
जिनका इस कृत्य में कोई दोष ना था।
खूब मुनाफा कमाया
जिन सरकारों और कंपनियों ने
प्राकृतिक स्त्रोतों के जमकर
दोहन से,
इसके कारण हुए
प्रकृति के कोप से वो तो
सुरक्षित रहे बहुधा
दूर कहीं सुरक्षित प्रतिष्ठानों में,
झेला हर बार
उन लोगों ने आपदाओं को
अपने ऊपर
जिनका इस कृत्य में कोई दोष ना था।
जितेन्द्र ‘कबीर
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र 7018558314


Related Posts

Umra bhar rotiyan seki by Vijay lakshmi Pandey

September 30, 2021

 उम्र  भर  रोटियाँ सेंकी…!!! उम्र  भर  रोटियाँ  सेंकी  हमनें , हाथ  जले  तो  असावधानी  हमारी  है। लॉट के  लॉट  बर्तन 

Insan tyag sakta hai by Jitendra Kabir

September 30, 2021

 इंसान त्याग सकता है जब देखता हूं मैं किसी स्वर्ण को  अपने दलित ‘बॉस’ या फिर दलित सहयोगी के साथ

Shipra ke kinare by Dr. H.K. Mishra

September 30, 2021

 शिप्रा के किनारे महाकाल के प्रांगण में जब , हम दोनों चलकर आए थे , दर्शन पूजन कर शिव का

Muktidham by Dr. H.K. Mishra

September 30, 2021

 मुक्तिधाम प्रीत की रीत निभाने को दो गीत मिले गाते गाते, एक प्यार तुम्हारे पाने का, दूजे दर्द भरे एहसासों

Maa mujhe na mar by mainudeen kohri

September 30, 2021

 माँ मुझे ना मार माँ, मैं भी कुल का मान बढाऊँगी । माँ ,मैं भी रिश्तों के बाग सजाऊंगी।। माँ,मुझे

Betiyan by Anita Sharma

September 29, 2021

 बेटियाँ बिटिया से घर संसार है, रौनक घर परिवार है। सबके बीच की अहम् कड़ी। प्यार और विश्वास की मूरत

Leave a Comment