Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

करुणा दया ममता वात्सल्य के भाव

 करुणा दया ममता वात्सल्य के भाव  आओ प्रकृति से प्रेम और हर जीव के प्रति संवेदनशीलता सहिष्णुता भारतीय संस्कृति को …


 करुणा दया ममता वात्सल्य के भाव 

आओ प्रकृति से प्रेम और हर जीव के प्रति संवेदनशीलता सहिष्णुता भारतीय संस्कृति को सहज स्वभाव से अपनाएं 

मां भारती की मिट्टी में ही अद्भुत शक्ति – जन्म से ही समा जाते है करुणा दया ममता के भाव – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – भारत की मिट्टी में ऐसी अनमोल शक्ति है कि यहां जन्म लेने वाले हर मानवीय जीव के विशाल हृदय में करुणा दया ममता का अनमोल, अनोखा ख़जाना भर जाता है और करुणा दया ममता न केवल माननीय जीवो के प्रति परंतु सारी सृष्टि के 84 लाख़ जीवों, जिसमें पशु पक्षी, जानवर यहां तक कि चींटी जैसे छोटे जीवों के लिए भी अपार करुणा दया ममता समाई हुई है। साथियों बात अगर हम मां भारती की गोद में दुलारे मानव जीव की करें तो वह हजारों वर्षों से मूक जीवो, पशु पक्षियों के प्रति दया भावना रखते हैं। अगर हम कुछ अपवादों को छोड़ दें तो इन मूक जीवो की सेवा, सुरक्षा, रक्षा करना आध्यात्मिक धर्म माना जाता है और हम इनकी पूजा भी करते हैं अनेक जीवो को हम देवी देवताओं का वाहन भी मानते हैं जिसमें गाय, गरुड़, शेर, मछली गज इत्यादि अनेक पशु शामिल हैं कई जीवो को हम घर में पालते भी हैं जिसमें डॉग खरगोश, बंदर, मिट्ठू, कबूतर इत्यादि जीव, पशु पक्षी शामिल हैं और उनको हम अपने घरों का सदस्य बनाए रखते हैं। हालांकि अभी वन्यजीव कानून के तहत अभी इसपर पाबंदी लगा दी गई है।

साथियों बाता अगर हम भारतीय कानूनों, नियमों और वाइल्डलाइफ एक्ट की करें तो जानवरों के प्रति कुछ अपवादी मानवों द्वारा क्रूरता ढाने के कारण अनेक प्रतिबंध और कठोर नियम बनाए गए हैं जिसमें अब पक्षियों को घर में पालना या बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के अन्य जीवो को पालना बंधनकारक है जिससे जीवो पर अत्याचार और क्रूरता रोकी जा सकती है। 

साथियों बात अगर हम हिंसक जीव जंतु जानवरों की करें तो बड़े बुजुर्गों का कहना है कि अगर हम किसी भी जीव जंतु जानवर को जब तक दुर्भावना से छेड़ोगे नहीं तब तक वह हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, अगर उनको हम छेड़ने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे तो फिर मज़बूरी में वह भी हिंसक हो जाता है और नतीजा मानवीय वध तक का अंजाम हो जाता है, इसीलिए ही शासन प्रशासन ने अनेक क्षेत्रों को प्रतिबंधित कर वहां बिना इजाजत मानवीय प्रवेश पर रोक भी लगाई है। 

साथियों बात अगर हम मानव का मूक जानवरों जीव जंतुओं से करुणा, प्रेम, वात्सल्य की करें तो हम पीपल के झाड़ के पास चींटियों को शक्कर, गुड़ डालते हैं, गाय की त्योहारों में पूजा कर भोजन, जलपान करवा कर व्रत तोड़ते हैं। हर धर्म में अपने अपने स्तरपर अनेक जीवो पशु पक्षियों की पूजा की जाती है, श्राद्ध के दिनों में कौओं को भोजन खिलाया जाता है। अगर हमारे ह्रदय दुलारे किसी जीव मसलन डॉग, खरगोश, बंदर, मिट्ठू या फिर शेर तक की किसी घटना, दुर्घटना या उम्रदराज मृत्यु हो जाती है तो हमें उसी तरह करुणा दुखी होकर रोते हैं जैसे हमने अपना मानवीय जीव प्रिय खो दिया है, यह है भारतीय मानव की करुणा दया ममता सांत्वना! 

साथियों बात अगर हम माननीय पीएम द्वारा भी मन की बात में इस विषय पर उनके विचारों की करें तो उन्होंने भी कहा , प्रकृति से प्रेम और हर जीव के लिए करुणा, ये हमारी संस्कृति भी है और सहज स्वभाव भी है। हमारे इन्ही संस्कारों की झलक अभी हाल ही में तब दिखी, जब मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिज़र्व में एक बाघिन ने दुनिया को अलविदा कर दिया। इस बाघिन को लोग कॉलर वाली बाघिन कहते थे। वन विभाग ने इसे टी-15 नाम दिया था। इस बाघिन की मृत्यु ने लोगों को इतना भावुक कर दिया जैसे उनका कोई अपना दुनिया छोड़ गया हो। लोगों ने बाकायदा उसका अंतिम संस्कार किया, उसे पूरे सम्मान और स्नेह के साथ विदाई दी। आपने भी ये तस्वीरें सोशल मीडिया में ज़रूर देखी होंगी। पूरी दुनिया में प्रकृति और जीवों के लिए हम भारतीयों के इस प्यार की खूब सराहना हुई। कॉलर वाली बाघिन ने जीवनकाल में 29 शावकों को जन्म दिया और 25 को पाल-पोसकर बड़ा भी बनाया। हमने टी-15 के इस जीवन को भी सेलिब्रेट किया और जब उसने दुनिया छोड़ी तो उसे भावुक विदाई भी दी। यही तो भारत के लोगों की खूबी है। हम हर चेतन जीव से प्रेम का संबंध बना लेते हैं। 

साथियों ऐसा ही एक दृश्य हमें एक बार गणतंत्र दिवस की परेड में भी देखने को मिला। इस परेड में प्रेसिडेंटस बॉडीगार्ड्स के चार्जर घोड़े विराट ने अपनी आख़िरी परेड में हिस्सा लिया। घोड़ा विराट, 2003 में राष्ट्रपति भवन आया था और हर बार गणतंत्र दिवस पर कमांडेंट चार्जर के तौर पर परेड को लीड करता था। जब किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का राष्ट्रपति भवन में स्वागत होता था, तब भी, वो, अपनी ये भूमिका निभाता था। इस वर्ष, आर्मी डे पर घोड़े विराट को सेना प्रमुख द्वारा सीओएएस कमेंडेशन कार्ड भी दिया गया। विराट की विराट सेवाओं को देखते हुए, उसकी सेवानिवृत्ति के बाद उतने ही भव्य तरीक़े से उसे विदाई दी गई।

साथियों बात अगर हम नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को लाए गए 8 चीतों की करें तो, इन्हीं आठ चीतों को लाने के लिए चीतों की तस्वीर वाला एक विशेष रूप से तैयार बोइंग 747-400 विमान नामीबिया भेजा गया था। इस स्पेशल विमान पर चीतों की खूबसूरत पेटिंग की गई थीं। इसी विमान की तस्वीर के साथ नामीबिया स्थित भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया, ‘बाघों की धरती से सद्भावना राजदूत ले जाने के लिए शौर्य की धरती पर उतरा एक विशेष पक्षी’। इस ट्वीट को जबर्दस्त सराहना मिली और लोग उत्साहित हुए।नामीबिया से भारत लाए गए आठ चीतों से तीन नर और पांच मादा हैं। नर चीतों में से दो की उम्र साढ़े पांच साल और एक की साढ़े चार साल है। नर चीतों में दो भाई हैं जो नामीबिया में ओत्जीवारोंगो के पास 58 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले निजी अभयारण्य में जुलाई, 2021 से रह रहे हैं। यह पहली बार होगा जब किसी मांसाहारी पशु को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप लाया गया है। 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने नामीबिया से चीता लाने को हरी झंडी दे दी थी। फिलहाल इस पूरी परियोजना के लिए सरकार 91 करोड़ का बजट निर्धारित किया है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि करुणा, दया, ममता वात्सल्य हर भारतीय मानव के हृदय में समाया है तथा प्रकृति से प्रेम और हर जीव के लिए करुणा भारतीय संस्कृति का स्वभाव है। मां भारती की मिट्टी में ही अद्भुत शक्ति है यहां जन्म से ही ये भाव मानव में समा जाते है करुणा दया, ममता और वात्सल्य के भाव। 

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

Desh ka man Lekh by jayshree birmi

August 22, 2021

 देश का मान जब देश यूनियन जैक की कॉलोनी था तब की बात हैं। उस समय में भी देश को

Kahan hai swatantrata by jayshree birmi

August 22, 2021

 कहां है स्वतंत्रता खुशी मानते है हम दुनिया भरकी क्योंकि अब आया हैं स्वतंत्रता का ७५ साल, यानी कि डायमंड

Swatantrata ke Alok me avlokan by satya prakash singh

August 14, 2021

 स्वतंत्रता के आलोक में – अवलोकन  सहस्त्र वर्ष के पुराने अंधकार युग के बाद स्वतंत्रता के आलोक में एक समग्र

Ishwar ke nam patra by Sudhir Srivastava

August 7, 2021

 हास्य-व्यंग्यईश्वर के नाम पत्र    मानवीय मूल्यों का पूर्णतया अनुसरण करते हुए यह पत्र लिखने बैठा तो सोचा कि सच्चाई

Lekh kab milegi suraksha betiyon tumhe by jayshree birmi

August 6, 2021

 कब मिलेगी सुरक्षा बेटियों तुम्हे गरीब की जोरू सारे गांव की भौजाई ये तो कहावत हैं ही अब क्या ये

seema ka samar -purvottar by satya prakash singh

August 3, 2021

सीमा का समर -पूर्वोत्तर पूर्वोत्तर की सात बहने कहे जाने वाले दो राज्यों में आज सीमा का विवाद इतना गहरा

Leave a Comment