Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Sonal Manju

करवा चौथ में चाँद को छलनी से क्यों देखते हैं?

करवा चौथ में चाँद को छलनी से क्यों देखते हैं? हिन्दू धर्म में अनेक त्यौहार हैं, जिन्हें भक्त, पूरे श्रद्धाभाव …


करवा चौथ में चाँद को छलनी से क्यों देखते हैं?

करवा चौथ में चाँद को छलनी से क्यों देखते हैं?

हिन्दू धर्म में अनेक त्यौहार हैं, जिन्हें भक्त, पूरे श्रद्धाभाव के साथ मनाते हैं। हर एक त्यौहार को मनाने एवं पूजने की विधि अलग होती है, जिसका नियमानुसार पालनकर, भक्त उस त्यौहार को संपन्न करते हैं। इन्हीं में से एक त्यौहार है, करवा चौथ । हिन्दू धर्म में करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएं, अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं।

यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे अहम व्रत माना जाता है। करवा चौथ के दिन, महिलाएं बड़े ही श्रद्धा भाव से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। इस दिन व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय जी और गणेश जी के साथ-साथ, चन्द्रमा की भी पूजा कर, चन्द्रमा को महिलाएं, छलनी में से देखती हैं और फिर उसी छलनी में से देखा जाता है पति का चेहरा। लेकिन, अक्सर यह सवाल मन में उठता रहता है कि, आखिर इस परपंरा के पीछे कारण क्या है? चन्द्रमा को छलनी से देखने की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है। लेकिन इस प्रथा का महत्व क्या है चलिए बताते हैं….कहते है भविष्य पुराण में लिखा है कि चौथ का चाँद देखना वर्जित(मना) होता है। चौथ का चाँद देखने से मिथ्या आरोप लग सकता है या फिर कहें कि कोई झूठा आरोप लग सकता है। वहीं करवा चौथ भी चौथ की ही तिथि है। यही कारण है कि चाँद को इस दिन खाली देखने की बजाए किसी वस्तू का इस्तेमाल करके (छलनी की ओट से) देखा जाता है।

एक और मान्यता के अनुसार छल से बचने के लिए भी छलनी का इस्तेमाल करते हैं। कहते हैं, प्राचीन समय में वीरवती नाम की विवाहित लड़की थी, जिसने शादी के बाद, पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा था। उस वक्त, वह अपने मायके में थी और उसके भाईयों से उसका भूखा रहना देखा नहीं गया। इसीलिए उन भाइयों में से सबसे छोटे भाई ने पेड़ की डालियों में एक छलनी के पीछे जलता हुआ दीपक रखा और अपनी बहन वीरवती को भ्रम से चन्द्रमा दिखाकर, उसका व्रत खुलवा दिया। जिससे करवा माता रुष्ट हो गईं और अगले ही पल वीरवती के पति की मृत्यु का समाचार मिला।

अपनी इस भयंकर भूल का अहसास जब वीरवती को हुआ तो उसने अगले साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर फिर से करवा माता का यह व्रत, विधि-विधान से किया और हर छल से बचने के लिए, इस बार हाथ में छलनी लेकर चंद्र देव के दर्शन किए। इससे प्रसन्न होकर माता ने उसके व्रत को स्वीकार किया और उसके पति को जीवित कर दिया। तब से लेकर अब तक, हमेशा छलनी में से ही चन्द्रमा को देखने की परंपरा है।

ये भी माना जाता है कि जब महिलाएं चाँद को देखती हैं और फिर पति के चेहरे को छलनी में दीपक रखकर देखती हैं, तो उससे निकलने वाला प्रकाश सभी बुरी नजरों को दूर करता है। साथ ही जब दीपक की पवित्र रोशनी साथी के चेहरे पर पड़ती है तो पति-पत्नी के रिश्ते में सुधार आता है।

हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन नई छलनी में से ही चाँद देखना चाहिए। जिससे किसी तरह का छल ना हो और करवा माता, व्रती महिला के, विधि-विधान से किए गए व्रत को स्वीकार करें।

करवा चौथ, मुख्य पर्वों में से एक है, जिसका इंतज़ार हर वर्ष, महिलाएं बड़ी बेसब्री से करती हैं और अपने पति की लम्बी आयु के लिए, पूरे रीति-रिवाज़ों के साथ, करवा चौथ के व्रत को संपन्न करती हैं।

About author 

Sonal manju

सोनल मंजू श्री ओमर

राजकोट, गुजरात

Related Posts

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति

July 12, 2023

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी लेखन पद्धति यदि मैं आज किसी के पसंद अनुसार चलती, या सरल भाषा मे अगर ये

आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं?

July 12, 2023

आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं? हाल के वर्षों में नदियों के पानी से डूबने वाले क्षेत्रों में शहरी बस्तियां

अब जीएसटी चोरी की तो ईडी का डंडा चलेगा

July 12, 2023

अब जीएसटी चोरी की तो ईडी का डंडा चलेगा  विपक्ष ने टैक्स आतंकवाद की संज्ञा दी जीएसटी काउंसिल की 50

सही अवसर की प्रतीक्षा करने की अपेक्षा वर्तमान अवसर का उपयोग करें

July 12, 2023

सही अवसर की प्रतीक्षा करने की अपेक्षा वर्तमान अवसर का उपयोग करें बेकार बैठने से बेहतर है कि आपके पास

किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा

July 12, 2023

किताबी शिक्षा बनाम व्यवहारिक शिक्षा डिग्रीयां तो पढ़ाई के खर्चे की रसीदें है – ज्ञान तो वही है जो किरदार

तीर्थयात्रा खुद की खोज का एक समग्र अनुभव है।

July 8, 2023

तीर्थयात्रा खुद की खोज का एक समग्र अनुभव है। धार्मिक तीर्थ स्थल भी लोगों के लिए प्रेरणा और प्रेरणा का

PreviousNext

Leave a Comment