Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो …


ऐ उम्मीद

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी
ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ।

क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।
तुम न होती तो भावनाएं आहत न होतीं।
किसी से कभी भी कोई चाहत न होती।
मैं खुद के लिए खुद का सहारा चाहता हूँ।
ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ।

मैं नही चाहता फिर से मजबूर हो जाऊँ।
मैं खुद से ही बहुत ज्यादा दूर हो जाऊँ।
मेरी जिंदगी को ऐसे बदलना चाहता हूँ मैं,
कि ताउम्र मैं खुद का गुरुर हो जाऊँ।
मैं जिंदगी में दिलखुश नजारा चाहता हूँ।
उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ।

उम्मीदों के टूटने का गम मुझसे न पूछिए।
कैसा हो जाता है जीवन मुझसे न पूछिए।
उम्मीदें खुद से की होती तो माजरा अलग होता,
उम्मीद कितनी थी खुद से,मुझसे न पूछिए।
उम्मीद से होना अब मैं बेसहारा चाहता हूँ।
ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ।

मेरी उम्मीद खुद से है ,यही तकदीर मेरी है।
मैं खुद का हो चला हूँ अब, यही तासीर मेरी है।
नाउम्मीदी के दौर में जो उम्मीद किया खुदसे,
इसके पीछे मुस्कुराती हुई तस्वीर मेरी है।
मैं खुद के आगे बुरे वक्त को हारा चाहता हूँ।
ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ।

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

दिल ढूँढता है-नंदिनी लहेजा

March 25, 2022

दिल ढूँढता है कहाँ गए बचपन के वो दिन,जो निश्चिंतता में गुजरते थे।ना लोभ था,ना कोई कपट,निश्छलता लिए रहते थे।दिल

कवि का ह्रदय है – नंदिनी लहेजा

March 25, 2022

शीर्षक-कवि का ह्रदय है  कवि का ह्रदय है खजाना विचारों का , कविता हैं उसकी कुंजी।हँसाते, रुलाते,कभी दिल को छू

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं न यह जीत आखिरी हैऔर न यह हार आखिरी है,रोजाना का संघर्ष है जीवनचलेगा

पाखंड लगता है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

March 25, 2022

पाखंड लगता है एक विजेता!अपने सारे संसाधनझोंक देता हैयुद्ध के मैदान मेंजीत के लिए,विजय उसका चरित्र हैलेकिनजब वो लगाता है

हालात बदलेंगे क्या?- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

हालात बदलेंगे क्या? आज जब नारे बुलंद होंगेदुनिया भर मेंमहिलाओं की सुरक्षा के,बहुत सारी महिलाएं संघर्ष कर रही होंगीहवस के

कोई रंग ऐसा बरस जाए- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

कोई रंग ऐसा बरस जाए इस बार होली में कोई रंग आसमां सेऐसा बरस जाए,कि बस इंसानियत के रंग में

Leave a Comment