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Gurudeen Verma, poem

ऐसे हम नववर्ष का,आओ सत्कार करें

ऐसे हम नववर्ष का,आओ सत्कार करें ऐसे हम नववर्ष का, आवो सत्कार करें।द्वेष, नफरत मन से मिटाकर, सबका उद्धार करें।।ऐसे …


ऐसे हम नववर्ष का,आओ सत्कार करें

ऐसे हम नववर्ष का, आवो सत्कार करें।
द्वेष, नफरत मन से मिटाकर, सबका उद्धार करें।।
ऐसे हम नववर्ष का—————–।।

नई सुबह पर जीवन की, नई ऐसे शुरुआत करें।
माने सबको अपना साथी, हंसकर सबसे मुलाकात करें।।
फ़िजा लगे महकी महकी,खुशबू फैली हो हरतरफ ।
हर चेहरा गुलजार लगे, गुलशन में ऐसी बहार भरे ।।
ऐसे हम नववर्ष का ————————।।

लालिमा नये सूरज की , नई ऊर्जा हर दिल में भरें।
आंखों में तेजस नया हो, शुभ शब्दों से लब हो भरें।।
सरस सलिल हो हर मन, नववर्ष की नव सुबह में ।
चंद्रमा सा शीतल हो हृदय, पाप-क्रोध अलविदा करें।।
ऐसे हम नववर्ष का ————————।।

प्रगति और समृद्धि हो , हर मानव की भारत में ।
जाति – धर्म के बलवे नहीं हो, नई सदी के भारत में।।
जज्बा भरें देशभक्ति का , हर मन में नववर्ष पर ।
अपना वतन हो उन्नत, खुशहाल, ऐसा आज प्रण करें ।।
ऐसे हम नववर्ष का ————————।।

About author 

Gurudeen verma
शिक्षक एवं साहित्यकार-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)


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