Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

ऐसे बदलाव नहीं आएंगे

 ऐसे बदलाव नहीं आएंगे जितेन्द्र ‘कबीर’ सिर्फ इसलिए कि हमें बुरा लगता है देखना… देश को दंगे-फसादों में जलते हुए, …


 ऐसे बदलाव नहीं आएंगे

जितेन्द्र 'कबीर'
जितेन्द्र ‘कबीर’

सिर्फ इसलिए

कि हमें बुरा लगता है देखना…

देश को दंगे-फसादों में

जलते हुए,

मानवता को विभिन्न धर्मों की

बलि-वेदी पर रोज चढ़ते हुए,

निर्दोष बच्चियों एवं महिलाओं को

क्रूर भेड़ियों का शिकार बनते हुए,

सिर्फ इसलिए

कि हमें बुरा लगता है सोचना…

एक दिन कहीं

खाने-पहनने की हमारी

व्यक्तिगत आजादी

राजनीति की भेंट न चढ़ जाए,

एक दिन कहीं

निष्पक्ष राय रखने की हमारी

व्यक्तिगत आजादी

जेलों में न सड़ जाए,

वे रुक नहीं जाएंगे!

वे रुकेंगे केवल तब ही

जब उनको रोकने के लिए

धरातल पर सामूहिक प्रयास किए जाएंगे,

उतरना पड़ेगा पूरे मन से

उनके खिलाफ रणक्षेत्र में,

सिर्फ देखने एवं सोचने भर से

बदलाव नहीं आएंगे।

                                    जितेन्द्र ‘कबीर’                                  

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment