Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

mainuddin_Kohri, poem

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन -मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ बीकानेरी”

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन । ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन ।तुझको मेरा नमन , तुझको मेरा नमन ।। आबरू तेरी जाने नां देंगें कभी । …


ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन ।

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन -मईनुदीन कोहरी"नाचीज़ बीकानेरी"

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन ।
तुझको मेरा नमन , तुझको मेरा नमन ।।

आबरू तेरी जाने नां देंगें कभी ।
जब तलक बाजुओं में हमारे है दम।।
दुश्मनों के इरादों का कर देंगे दमन ।।।
ए- जमीन…………………!

हौसले है बुलन्द , छू लेंगें गगन ।
कोई छू के तो देखे हमारी तपन।।
बांधे रखते हैं सर पे हर दम कफ़न ।।।
ए-जमीन…………………..!

तेरी शान-ओ-शौकत जमाने भर में है।
ऊंचे आकाश के चांद – सितारों में है।।
खुशियों से भर देंगें ये सारा चमन ।।।
ए-जमीन……………………….!

बदल के रख देंगे जमाने की तशवीर ।
चमकेगी जमाने मे जय हिन्द की शमशीर।।
जमाने भर को देंगें हम तौफा-ए-अमन।।।
ए-ज़मीन………………………..!

ये तिरंगा करोड़ों के दिलों की है धड़कन।
हर इक के दिलों मेबसा है जन-गण-मन।।
शहीदों की शहादत को करते हैं नमन।।।
ए-जमीन……………………….!

फुले – फले सदा भारत का ये चमन ।
सदभाव से आतंक को कर देंगे दफन।।
“जिओ और जीने दो”की है हमारी लग्न।।।
ए-जमीन…………………वतन ।
तुझको हमारा नमन ,तुझको हमारा नमन।।

मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ बीकानेरी”
मोहल्ला कोहरियांन बीकानेर
मो 9680868028


Related Posts

जीने का अनुराग नहीं – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

जीने का अनुराग नहीं प्यासी है नदियां प्यासा है सावन,बर्षा की बेला प्यासा है चातक ,प्यासी है धरती प्यासा है

राधा की पीड़ा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

राधा की पीड़ा चल केशव बरसाना जाना,रूठ गयी जहां राधा रानी ,वृंदावन को भूल गयी है ,अपनों से भी रूठ

देर लगेगी- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

देर लगेगी बदल गया जमाना है…. जरा देर लगेगीन कोई ठौर ठिकाना है…..जरा देर लगेगीतुम होते जो कुत्ते! तो लेते

बताओ न कैसे रहते हो ?–सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-बताओ न कैसे रहते हो मौसम ठंडा सूरज मद्धमऊपर से बदन पर

नई आस- जयश्री बिरमी

January 6, 2022

नई आस बहुत दिनों के बाद अब जगी हैं एक नई आसहर्षोल्लास के दिन भी थे ये दिलाती हैं एहसास

अलविदा- सुधीर श्रीवास्तव

January 6, 2022

अलविदा अब तुम जा रहे होन तनिक सकुचा रहे हो,लगता है बड़े बेशर्म हो गये हो।जाओ न हम भी कहां

Leave a Comment