Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

एक समय था – अनीता शर्मा

एक समय था एक समय था–जब साथ सभी रहते थे। चाचा चाचाजी और बच्चे–ताऊ ताई और बच्चे। कितना बड़ा परिवार …


एक समय था

एक समय था - अनीता शर्मा
एक समय था–
जब साथ सभी रहते थे।

चाचा चाचाजी और बच्चे–
ताऊ ताई और बच्चे।

कितना बड़ा परिवार था-
रोज त्यौहार सा लगता था।

न कोई दोस्त की जरूरत
बस-आपस में ही खेलना-लड़ना।

रूठना-मनाना हुआ करता था।
किसी को पता भी नहीं चलता था
कौन किसका भाई बहन ?
सब आपस में मिलकर रहते थे।

कितना हो-हल्ला,चहल-पहल होती थी।
सारे मौसम घर पर ही मिलते थे।
सुख-दुख,हंसना-रोना,और लड़ना-झगड़ना।
फिर एक हो जाना ।

वो बात ही अलग थी।
एक सुकून सा था।
एक दूसरे की फिक्र भी थी।
तब था एक सबंल संबंधों का।
आज सभी अकेले अपने में।
चहल पहल गायब है।
मशीनी सी होकर रह गई है जिन्दगी।

—-अनिता शर्मा झाँसी
—-मौलिक रचना


Related Posts

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

Leave a Comment