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“एक बनकर देश और धर्म की रक्षा करो”-भावना ठाकर

“एक बनकर देश और धर्म की रक्षा करो” जिस धरती पर हमने जन्म लिया उसके प्रति हमारा एक ऋण होता …


“एक बनकर देश और धर्म की रक्षा करो”

"एक बनकर देश और धर्म की रक्षा करो"-भावना ठाकर
जिस धरती पर हमने जन्म लिया उसके प्रति हमारा एक ऋण होता है, जिसे अपना कर्तव्य निभाते चुकाना हमारा फ़र्ज़ बनता है। राष्ट्र की उन्नति में हम कितना योगदान देते है ये सोचनीय मुद्दा है जो देश के प्रति समर्पण भाव से ही प्रशस्त होता है। भारतीय संस्कृति यश और वैभव का एक हिस्सा रहा है। देशप्रेम कर्तव्य का निर्वहन हर भारतीय ने हंमेशा जी जान लगाकर किया है। जब-जब हिन्दुत्व पर सवाल उठे हर भारतीयों ने जमकर जवाब दिया। भारत शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा देश होगा जहाँ देश को माँ समझकर मिट्टी को चूमकर सर चढ़ाया जाता है। हमें संस्कारों में मातृभूमि को वंदनीय समझने की शिक्षा दी जाती है तभी देशप्रेम का ख़ुमार हमारी नस-नस में है। महज़ माटी के पुतले नहीं हम भारतीयों के चर्चे पूरे जग में है। दिन-ब-दिन हमारा देश कामियाबी की बुलंदियों को छू रहा है, हर क्षेत्र में विकास और नित नये अनुसंधान साध रहा है। एक समय ऐसा आ गया था की विश्व के नक्शे में भारत औंधे मुँह पड़ा था, पाकिस्तान जैसा छोटा आतंकी देश भी पैरों की जूती समझकर आए दिन बम धमाके करके निकल जाता था। पर आज हालात बदल गए है। भारत अब विश्व गुरू और महासत्ता बनने की और आगे बढ़ रहा है। विश्व के सारे बड़े देशों से अपना लोहा मनवाते सबकी नजरों में उपर उठ रहा है। सरहद पर हमारे सिपाही की बहादुरी से दुश्मनों को मुँह तोड़ जवाब मिल रहा है।
नये हिन्दुस्तान की नींव यूँहीं मजबूत नहीं एक-एक भारतीयों ने यथोचित योगदान से भारत को उपर उठाया है। इस धधकती आग के शोलों को ओर हवा देकर हंमेशा इस महायज्ञ में अपने कर्तव्य की आहुति देते अखंड रखना है। रत्न गर्भा धरती के प्रति और हिन्दुत्व के प्रति हर देशवासियों को जागरूक होते राष्ट्र वंदना में अपना तन-मन लगाना होगा। एक ही देश में वैचारिक असमानता देश को तोड़ देती है, देश के हर मुद्दों में कमियां निकालना छोड़ दो। आज जिस तरह से इंसानों के मन में इंसान के प्रति कड़वाहट फैल रही है इस परिस्थिति पर समालोचना बनती है। अपने देश की हर चीज़ से प्यार करो फिर चाहे संस्कृति हो, धर्म हो, परंपरा हो या भाषा स्वदेशी बनों। हाय हैलो, गुड मार्निग नहीं हर मिलने वालों से जयहिन्द, या जय भारत बोलो।
सबसे पहले अपने धर्म के प्रति आस्था रखो कट्टरवाद ही समूह में जोश भरता है, मातृभूमि और धर्म की रक्षा ही एक सच्चे देशभक्त की परिभाषा है। देश में सिर्फ़ पेट्रोल डिज़ल या महंगाई ही अहम् मुद्दे नहीं, आज के दौर में ये मुद्दे वैश्विक बिमारी है उससे उपर उठकर देखो। हमारे देश को खोखली कर रही है धर्मांधता और जेहादी सोच, जिसे मौजूदा सरकार ने अपनी नाक के नीचे दबाकर रखा है। धर्म परिवर्तन करवाने वालों की नीयत को समझो, ये देश को और हिन्दुत्व को ध्वस्त करने की पहल है। अगर अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित देश का नागरिक बनाना चाहते हो तो पहले देश को सुरक्षित बनाओ। कुछ लोग इसी देश का हिस्सा होने के बाद भी इसी देश के अंदर दुश्मन बनकर बैठे है, जिस थाली में खाते है उसी में छेद करते देश को बांटने का काम करते है, ऐसे देशद्रोहीयों को पहचानों। चाहे वो नेता हो या आम आदमी जो धर्म को ज़रिया बनाकर लोगों की मानसिकता को भड़काने का काम करते है, ऐसे लोगों की बातों में आकर सोशल मीडिया पर हिन्दुओं को हिन्दु से ही लड़ते देखा है। अंदर ही अंदर वैमनस्य को पालना देश की नींव में दीमक का काम करता है। जैसे परिवार में हमारा किसीसे मतभेद होता है फिर भी अगर कोई तीसरा आकर उसे ऊँगली करने आता है तब हम सारे गीले शिकवे भूलाकर अपनों का साथ देते है, वैसे ही देश को एक परिवार समझकर अपनापन जताईये। आपस में भिड़ना बंद कीजिए, इंसान का इंसान से भाईचारा ही देश की ताकत है। हिन्दुओं एक बनों, एकता की लाठी से ही हम देश की और धर्म की रक्षा कर पाएंगे।
भावना ठाकर ‘भावु’ (बेंगलोर, कर्नाटक)

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