Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज …


उलझे-बिखरे सब”

उलझे-बिखरे सब"- अनीता शर्मा
कितने उलझे-उलझे हुए सब ,

कितने बिखरे-बिखरे हुए सब।

बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब,

दिखावटी सब सज-धज ओढ़ी है।

अंदर से खाली-खाली सब दिखते ,

खोखलेपन में टूट रहे सब भीतर ।

टूट रहे अंदर-अंदर,बाहर चमक-

निराली सी,अजब तेरी कहानी बंदे।

सांसे भी गिनती की दे भेजी रब ने,

उलझनों में उलझ बर्बाद करी सब ।

बची-खुची समेट अंतस की शांति में ,

सुलझी सी जिन्दगी चुन अब जी ले ।

भटकाव बहुत आयेंगे जीवन में,

चमक धमक चौंकाने वाली ।

छुपकर आँसू व्यर्थ बहा मत ,

खुद में खुद की खोज करें सब ।

चिंता तनावमुक्ति सर्वोपरि जीवन में,

सरल-सहज हो अंतस-बाहर ।।

क्या थे?क्या है? क्या हो रहे सब?

पल-भर ठहर :विचार करें सब ।।

—अनिता शर्मा सुधा नर्सिग होम झाँसी

—-मौलिक रचना


Related Posts

Kavita – antim iccha | अंतिम इच्छा

December 30, 2023

अंतिम इच्छा सुनो दिकु… बस एक अंतिम इच्छा हैतुम से मुलाकात करने कीमेरे जीवन में तुम्हारा जो महत्त्व है उसपर

कविता-सूखा पेड़ | sukha ped

December 30, 2023

कविता-सूखा पेड़ सूखे पेड़ को भी हराभरा होने की आश हैजैसे किसी प्यासे को पानी की प्यास हैदूसरे हरेभरे वृक्ष

कविता – तितली | kavita Titli

November 26, 2023

कविता :तितली | kavita – Titli  आसमान है रंग-बिरंगीरातों की झिलमिल-झिलमिलऔ तारों की चमक सुनहलीतितली के पंखों – सी उड़ी

कविता –औरत संघर्ष

November 14, 2023

कविता –औरत संघर्ष मेरी दोस्त! जब मैंने तुम्हें पढा़,तब मुझे एक जीवंत स्त्रीत्व का बीता हुआ कल स्मरण हो आया..राजनीतिक

कविता: दिवाली | kavita Diwali

November 13, 2023

कविता: दिवाली सुनो दिकु…अंतर्मन का अँधेरा मिट जाएगातुम्हारे आने से दिल का दीप जल जाएगा धरा होगी नर्म-सी शीतलइश्क में

देश की राजनीति और राजनीति का देश

November 12, 2023

“देश की राजनीति & राजनीति का देश “ सचमुच! यह तो ‘भारत’ हैभारत! हाँ, वही भारत, जहाँ चाणक्य थे। चाणक्य?

PreviousNext

Leave a Comment