Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

उनके संज्ञान में क्यों नहीं है?-जितेन्द्र ‘कबीर’

उनके संज्ञान में क्यों नहीं है? हर बार सामने आती हैंजांच एजेंसियों कीदेरी और लापरवाही की खबरेंबलात्कार,हत्या जैसे संगीन मामलों …


उनके संज्ञान में क्यों नहीं है?

उनके संज्ञान में क्यों नहीं है?-जितेन्द्र 'कबीर'

हर बार सामने आती हैं
जांच एजेंसियों की
देरी और लापरवाही की खबरें
बलात्कार,हत्या जैसे संगीन मामलों में,
समझ में नहीं आता
कर्त्तव्य के निर्वहन में इतनी अकर्मण्यता
हर क्षेत्र में अव्वल होने का दावा करने वाली
सरकारों के संज्ञान में क्यों नहीं है?

हर बार सामने आती हैं
अपराधियों की व्यवस्था से सांठ-गांठ
की खबरें संगीन अपराधों में,
समझ में नहीं आता
व्यवस्था में अपराधियों की इतनी घुसपैठ
कानून के राज का दावा करने वाली
सरकारों के संज्ञान में क्यों नहीं है?

हर बार लड़नी पड़ती है
पीड़ित को
इंसाफ की खातिर लम्बी और मुश्किल लड़ाई
अपराधियों के खिलाफ,
समझ में नहीं आता
कानून एवं न्यायिक व्यवस्था में इतनी
असंवेदनशीलता
हर क्षेत्र में सुधार का दावा करने वाली
सरकार के संज्ञान में क्यों नहीं है?

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Bhut yad aate ho tum by vijay Lakshmi Pandey

July 23, 2021

 शीर्षक : बहुत याद आते हो “तुम”…!!! ऊँची -ऊँची इमारतें …! शहरों की चहल -पहल , महंगी गाड़ियों की रेलम-रेल

Barish kavita by abhijeet anand bihar

July 23, 2021

शीर्षक – “बारिश”  आज धरा की गुहार है रंग लाई, नीले नभ में घनघोर बदरी छाई, प्रकृति की छटा मनमोहक

Daya kavita by anup kumar verma

July 23, 2021

 शीर्षक – दया  दया धर्म और प्रेम का, रखे नित हम ध्यान।  दया हृदय में रखिए, करे नहीं अभिमान।। करे

Talash kavita by Kalpana kumari Patna

July 23, 2021

 स्वरचित कविता तलाश ——– जाने कैसी डोर बंधी है, चाहूं भी तो छोड़ सकूं ना, मेरे हृदय के तार हो

swarg kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

स्वर्ग सुकर्म को चुनो है अब,    मनःशान्ति सुख मिलता।       स्वर्ग सा आनंद धरा में मिलता,  

chhoti behna kavita by Anita Sharma jhasi

July 23, 2021

 छोटी बहिना एक डाली के फूल थे हम ,     कितने बसंत साथ जिये।         हर

Leave a Comment