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Jitendra_Kabir, poem

उत्सव मनाता लोकतंत्र- जितेन्द्र ‘कबीर’

उत्सव मनाता लोकतंत्र महिला सुरक्षा काबड़ा सा सरकारी विज्ञापनअखबार के पहले पन्ने पर था,दूसरे व तीसरे पन्ने पर थीसामूहिक बलात्कार …


उत्सव मनाता लोकतंत्र

उत्सव मनाता लोकतंत्र- जितेन्द्र 'कबीर'

महिला सुरक्षा का
बड़ा सा सरकारी विज्ञापन
अखबार के पहले पन्ने पर था,
दूसरे व तीसरे पन्ने पर थी
सामूहिक बलात्कार के बाद
महिलाओं की लाश मिलने की
कई छोटी-छोटी खबरें,
ज्यादातर लोगों ने विज्ञापन को
सच्चाई मानते हुए
उन छोटी-छोटी खबरों को समझा
देश को बदनाम करने का षड़यंत्र,
दुष्कर्म-पीड़िताओं व उनके परिजनों की
पीड़ा का उत्सव मनाता रहा
हमारा लोकतंत्र।
करोड़ों रोजगार देने का
बड़ा सा सरकारी विज्ञापन
अखबार के पहले पन्ने पर था,
दूसरे व तीसरे पन्ने पर थी
बेरोजगारी से परेशान लोगों द्वारा
की जाने वाली आत्महत्या की
छोटी-छोटी खबरें,
ज्यादातर लोगों ने विज्ञापन को
सच्चाई मानते हुए
उन छोटी-छोटी खबरों को
देशद्रोहियों का षड़यंत्र,
आत्महत्या के लिए मजबूर लोगों
व छात्रों की मजबूरी का उत्सव मनाता रहा
हमारा लोकतंत्र।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


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