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उतावला पन नही- सतर्कता बहुत जरूरी- ऐसे पहचाने

उतावला पन नही- सतर्कता बहुत जरूरी- ऐसे पहचाने हां जी हां, सही कह रही हूं। बहुत ही सरल तरीका पहचानने …


उतावला पन नही- सतर्कता बहुत जरूरी- ऐसे पहचाने

उतावला पन नही- सतर्कता बहुत जरूरी- ऐसे पहचाने

हां जी हां, सही कह रही हूं। बहुत ही सरल तरीका पहचानने का- सतर्कता जरूरी। बस सबसे पहले नवयुवतियों आपको एक बात का ध्यान रखना है। उतावला पन नहीं। क्यों कि मैं भी आपकी उम्र के दौर से निकल चुकी जहां उतावला पन दिल की तरंगों नाकाबिल बना देता। कुछ भी सोचने नहीं देता, सम्पूर्ण शक्ति हमारी सोचने की ये मोहब्बत जिसे कहते हैं अंधी राह की ओर खींच लेता संभलने का मौका ही नहीं देता। आंख तब खुलती जब कभी एक भयावह हादसा हमारे संग या कहीं ओर किसी संग होता इसलिए उतावलेपन नहीं सतर्कता से पहचानने की जरूरत है सामने वाले को जो हमें अपनी मोहब्बत भरी बातों के भंवरजाल के आगोश मे इस कदर जकड़ लेता की जहां से निकलना नामुमकिन हो जाता है। सच हमें पहचानना है उन नकाबपोश चेहरों को जो नाम से नहीं, परंतु अपनी गतिविधियों, बातों से ही पहचाने जा सकते हैं। बस करना क्या है, की अपनी आंखें, नाक, कान, और शब्दों के लय को पहचानना होगा। गतिविधियां यदि कुछ अलग हट कर लगें तो एहतियात बरतनी होगी। अभी भी मेरे शब्दों के मकड़जाल मे उलझे होंगे आप पाठक की कैसे और क्या कहना चाह रही आखिर लेखिका वीना? आखिर किस विषय पर व्यंग्यात्मक तीर छोड़ रही वीना? समझ से परे जा रहा आज वीना के शब्दों का मायाजाल। यही सोच रहे ना। तो आइये आपके उलझते सवालों को मैं सुलझा कर अपने सरल शब्दों मे मन की बात रखती हूं।
आज के समय में नित लव जिहाद से संबंधित बहुत से चर्चे खबरों की सुर्खियों मे छाए रहते हैं। उनमें एक खास बात पर यदि किसी ने गौर फ़रमाया होगा तो एक विशेष बात आप सभी को महसूस होगी। कि आज के लड़के जो विशेष समुदाय से संबंध रखते हैं वो लड़कियों संग हिंदू नामों को रख दोस्ती करते, और दोस्ती की समस्त हदों को पार करने के लिए आतुर रहते। जब उनकी आतुरता की भूख शांत हो जाती या भूख शांत करने के लिए लड़की तैयार नहीं होती तो उसका क़त्ल बेरहमी से कर देते हैं। जिसे बाद मे नाम दिया जाता है- लव जिहाद।
कहां जाता है प्यार तो अंधा होता है। मानती हूं प्यार कभी भी किसी से भी हो सकता परंतु इस अंधे प्यार के अंतर्गत सतर्कता आज के हालातों को गौर मे रख कर करना बहुत जरूरी है। लड़कियों को बस तुरंत मिले और तुरंत प्यार वाले तंज़ मे ना पढ़कर पहले लड़कों की गतिविधियों पर नज़र रखना बहुत जरूरी है। एक माह या दो माह के अंतर्गत ही आपको उसकी भाषा शैली, या गतिविधियों से ये ज्ञात हो ही सकता है कि लड़का कहीं किसी विशेष समुदाय का तो नहीं। जो अपना नाम हिंदु बताकर आप को छल रहा।
जैसे की उसे बार-बार अपनी हिंदु सनातन धर्म के बारे में बताएं, उसे अपने साथ नित मंदिर ले जाएं, उससे मंत्रों उच्चारण करने को कहें, उसे गीता के श्लोक पढ़ने को कहें। इससे आप भी अपने धर्म और संस्कृति से रूबरू हो सकेंगी। साथ ही आपके साथ जो जिंदगी भर गुजारने के सपने देख रहा वो भी आपके समक्ष, आपकी कसौटी पर खरा उतरेगा। यदि सामने वाले के चेहरे पर नकाब लगा है कालीख भरा तो वो आपके द्वारा ली जा रही परीक्षा मे पूर्ण रूप से अनुत्तीर्ण होगा। वैसे यदि दिल कि बात कहूं तो हमारे अपनों से बेहतर हमारे लिए कोई नहीं है। हमारे अपने हमारे लिए बेहतर की तलाश करते हैं। यदि आपके जीवन मे कोई परेशानी आएगी तो मां बाप से बेहतर आपका सहारा कोई नहीं हो सकता। यदि आपने अपने परिवार के विरुद्ध कदम बढ़ाया तो आप अपने अहित के जिम्मेदार स्वयं होंगे। नहीं जानता कोई भी की किसके चेहरे पर किस नाम का नकाब लगा है। समीर या सलीम। आप बेटियां ही अपने सनातन धर्म, संस्कृति के आईने से रू-ब-रू करवा कर किसी भी चेहरे पर लगा नकाब समाज के सामने उतार कर एक सीख बन सकती है दूसरी अपनी जैसी बेटियों, बहनों को बचाने के लिए।

About author

Veena advani
वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र

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