Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

उड़ गई तितली- देवन्ती देवी चंद्रवंशी

 उड़ गई तितली कैसे कहूॅ॑ सखी कुछ कही न जाए मन हुई तितली देखो उड़ती जाए कैसे रोकूॅ॑ मेरी बावरी …


 उड़ गई तितली

उड़ गई तितली- देवन्ती देवी चंद्रवंशी

कैसे कहूॅ॑ सखी कुछ कही न जाए

मन हुई तितली देखो उड़ती जाए

कैसे रोकूॅ॑ मेरी बावरी हुई  है  मन 

कैसे रोकुॅ॑ प्रीत की आग लगी तन

 

सुन सखी मैं पिया को खत लिखी

तितली सी उड़ती हुई  मन लिखी

तुम्हारे लिए प्यार विरह की राग में

कब तक जलूॅ॑गी ,तड़पती आग में

तितली सा हुई मेरी मन रोकूॅ॑ कैसे

प्रीत लग गई, तुम जैसे परदेसी से

 

खत पढ़के साजन तुम आ जाना

प्यार से मुझको तुम  गले लगाना

पिया,फूलों से सजी लगी है झूला

आ जाओ मिलकर  झूलेंगे  झूला

सावन में किए थे वादा याद करो

प्यार की मौसम है ना बर्बाद करो

तितली सा हुई है मन रोकूॅ॑ मैं कैसे

उड़ती जाए मन गगन की राहों से

टूट गई सपना ,मन आ गई वापस

कहती देवन्ती प्यार में रख साहस

श्रीमती देवन्ती देवी चंद्रवंशी
       धनबाद झारखंड


Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment