Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

ईर्ष्या तू ना गई – डॉ. इन्दु कुमारी

ईर्ष्या तू ना गई देखकर लोगों की सुख-सुविधा जल रही तू खूब जलन सेअपनी दुख की चिंता नहीं हैदूसरों के …


ईर्ष्या तू ना गई

ईर्ष्या तू ना गई - डॉ. इन्दु कुमारी

देखकर लोगों की सुख-सुविधा
जल रही तू खूब जलन से
अपनी दुख की चिंता नहीं है
दूसरों के पीछे पड़ी मगन से
ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से
ईर्ष्या की बेटी है निंदा
करती सदा दूसरों की चिंता
शांत घर में आग लगाती
यह उन्हीं की है धंधा
गड़े मुर्दे उखाड़े जतन से
ईर्ष्या तू ना गई मेरे मन से
ईर्ष्या का अनोखा वरदान
तुलना दूसरों से करते नादान
ईर्ष्यालु से बढ़कर कोई नहीं
जो बढे आगे ,पीछे पड़े
वह सब कामकाज छोड़कर
हानि पहुंचाना कर्म श्रेष्ठ समझे
ईर्ष्या का संबंध प्रतिद्वंदिता
भिखारी जलते नहीं करोड़पति से
ईर्ष्या तू न गई मेरे मनसे
ईर्ष्यालु व्यक्ति भिन-भिनाती
मक्खियां की तरह अकारण
हीं भिनभिनाया करती
सच में यह बीमार व्यक्ति है
जिनका चरित्र उन्नत है
ह्रदय निर्मल विशाल है
चिढ़ते नहीं बेचारे के चिढ़न से
ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से
नए मूल्यों के निर्माण है करना
नित्से का मानो कहना
इन बेचारों से क्या चिढना
कर्म पथ पर आगे बढ़ना
अभाव ईर्ष्यालु बनाता है
रचनात्मक शैली अपनाओ जतनसे
इंदु ईर्ष्या जाएगी मनसे
ईर्ष्या तू जा मेरे मन से।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

बता रहा है धुआँ – सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 7, 2022

शीर्षक – बता रहा है धुआँ आदमी अंदर और बाहर उड़ा रहा है धुआँ तिल -तिल फेफड़ों को सड़ा रहा

कितनी हैरानी की बात है!- जितेन्द्र ‘कबीर

January 7, 2022

कितनी हैरानी की बात है! कितनी हैरानी की बात हैकि भौतिक जीवन की सार हीनता औरमृत्यु को सहज भाव से

नशा एक परछाई-जयश्री बिरमी

January 7, 2022

नशा एक परछाई क्यों चाहिए तुम्हे वो नशाजो तुम्हे और तुम्हारे प्यारोंको करता बरबाद हैं नशा करों अपने काम काया

द्विधा में लोकतंत्र- जयश्री बिरमी

January 7, 2022

 द्विधा में लोकतंत्र  विरोध किसका संस्कृति का? क्यों हमारे समाज में कोई भी प्रश्न नहीं होने के बावजूद प्रश्नों को

सुबह- चन्दा नीता रावत

January 7, 2022

। । सुबह ।। सुबह सवेरे जब रात ढले सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आतीपृथ्वी के हरे चादर पर लालिमा

गगन की बुलन्दीयो को छुना- चन्दानीता रावत

January 7, 2022

गगन की बुलंदियों को छूना हैं  उड़ना है हमे उड़ना हैगंगन की बुलंदियों को छूना हैआँखो के हसीन ख्वाब कोवास्तविकता कर जीना

Leave a Comment