Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर …


ईमानदारी

ईमानदारी

कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जरा
ढूंढा तुझे गांव गांव और गली गली
ढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर को चली
दुकानों में ढूंढा दफ्तरों में भी ढूंढा
गई मैं विद्यालय और महाविद्यालय भी
अब बताओं कहां और ढूंढू तुम्हे
किसी के दिल में भी न मिली
न ही मिली दिमाग में कीसीके
नहीं दिखी किसी के व्यवहार और परिवार में
आस पड़ोस में भी न मिली
देखा मैंने रब के द्वार पर भी
और ढूंढा कहां कहां नहीं
हार कर पहुंची न्याय के द्वारे
और पहुंची नेताओं के घर भी
अब तो तू ही बता दे ए परदा नशीं
ढूंढू मैं तुझे तू कह दे वहीं
अब हुई बहुत मिन्नते बता दे
तू प्यार से ए ’ईमानदारी’
हस्ती तेरी किस जगह हैं
अब तो ढूंढ कर थक चुकी हूं
पक चुकी तेरे ही इंतजार में
अब बताएं दे जालिम हस्ति तेरी कहां हैं ए ईमानदारी….. तेरी

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

विद्यालय “स्कूल” हो गये…. -सचिन राणा “हीरो”

December 27, 2021

विद्यालय “स्कूल” हो गये…. नये भारत में विद्यालय जब से स्कूल हो गये… परेशान हैं अभिभावक मगर बच्चे कूल हो

बीती रात हो गई भोर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 27, 2021

बीती रात हो गई भोर अंतर्मन की पूर्ण कामना, बिना तुम्हारे सभी अधूरे,एहसास हमारा अपना है,एकाकीपन जीवन अपना।। सानिध्य तुम्हारा

मर्जी उसकी-डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 27, 2021

मर्जी उसकी पंख लगा उड़ने की इच्छा , मानव मन भी कर लेता है ,आशा और जिज्ञासा लेकर ,दूर गगन

परेशान होने की जरूरत नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

परेशान होने की जरूरत नहीं दिन – प्रतिदिन बढ़ती खाद्य पदार्थों की महंगाई से जनता कोजरूरत नहीं है परेशान होने

हाजिर जवाबी अटल बिहारी- डॉ. इन्दु कुमारी

December 27, 2021

हाजिर जवाबी अटल बिहारी देश की माटी ने दी सदाअमूल्य तोहफ़ा निशानीवीरता के परचम कोलहराते रहे हैं बलिदानी उन्हीं श्रेणी

रणछोड़ – डॉ. इन्दु कुमारी

December 27, 2021

शीर्षक -रणछोड़ जिस बातों की है वियोगछोड़ कर भागा रणछोड़ढूँढती है नैना तुझकोभूल गए सलोने मुझको वेदना हमें मिले उपहारक्या

Leave a Comment