Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Tamanna_Matlani

इस धरा पर…. ” (कविता…)

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात “इस धरा पर…. ” (कविता…) सूरज की पहली किरण से,जैसे जगमग होता ये संसार।दीपों …


नन्हीं कड़ी में….
आज की बात
“इस धरा पर…. ”
(कविता…)

सूरज की पहली किरण से,
जैसे जगमग होता ये संसार।
दीपों की सुनहरी चमक से,
उज्ज्वल हो जाता हर द्वार।।

दीप पर्व की अनुपम छटा से,
मिट जाता गहरा अंधकार।
विचारों की सकारात्मकता से,
महक जाता जीवन रूपी ये संसार।।

आस्था के पुष्प खिलने से,
खिलने लगी हर एक बगिया।
नयन मिले जब भगवन से,
रात-रात भर जागें ये अखियां।।

भक्ति के दीपक जलने से,
दिल ये धड़कता बारंबार।
मनमोहन के दर्शनों से,
मैं वारी जाऊं बलिहार।।

अयोध्या थी सूनी श्रीराम बिन,
कैसे लगता यहाँ खुशियों का अंबार।
सबकी व्यथा हुई दूर आज ही के दिन,
जब लौट आए रघुनंदन अयोध्या के द्वार।।

फिर इस धरा पर जगमगाया संसार,
सज रहे हैं आज घर-घर-द्वार- द्वार।
लगता है जैसे जन्म दुबारा ले रहें हैं श्रीराम,
संपूर्ण देश में गूंजेगा राम जी का नाम।।

इस दीपावली पर खिलते हुए,
हर चेहरे का प्रतीक हैं श्रीराम।
नाश बुराई का करते हुए,
रामराज्य लाएंगे प्रभु श्रीराम।।

About author 

Tamanna matlani

तमन्ना मतलानी
गोंदिया(महाराष्ट्र)


Related Posts

माँ- R.S.meena Indian

December 19, 2021

कविता माँ मैं व्रत नहीं करता ,कहीं माँ जैसी सूरत नहीं । माँ बाप को भूल जाऊ,ऐसा कभी मुहूर्त नहीं

पता नही-अजय प्रसाद

December 18, 2021

“पता नहीं “ खुश हूँ मैं या खफ़ा पता नही दुआ हूँ के बददुआ पता नही । हलचल तो है

भान दक्षिणायन भए- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 18, 2021

भान दक्षिणायन भए…!!! भान दक्षिणायन भए, शिशिर सरकारी।पछुआ बयार मोहे ,तीर सम लाग्यो है ।। बिकल बौराई मैं,थर-थर बदन काँप्यो।ऐसे

मैं चटख साँवरी….!- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 18, 2021

मैं चटख साँवरी….!!! मैं चटख साँवरी, श्याम रंग मेरो..!!!मैं सज के सँवर के,जो निकलूँ ,तो क्या बात..? मैं बड़ी खूबसूरत,बड़ी

गुलाब-डॉ. माध्वी बोरसे

December 18, 2021

गुलाब! गुलाब का फूल, अति सुंदर और सुगंधित, करते है हम, परमेश्वर के चरणो में अर्जित,चलो महका दे जहां, गुलाब

माता – पिता-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 18, 2021

माता – पिता! जब 1 साल के थे हम बच्चे, नहला के पहनाते थे कपड़े वह अच्छे! उस वक्त रो-रो

Leave a Comment