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Gurudeen Verma, poem

इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार | isliye tumse milta hu mai bar bar

 इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार इसलिए तुमसे मिलता हूँ , मैं बार बार। मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए …


 इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार

इसलिए तुमसे मिलता हूँ , मैं बार बार।
मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए बार बार।।
इसलिए तुमसे मिलता हूँ—————–।।
मुझसे बेशक रहे तू , हमेशा मेरे दिलबर।
करें यकीन मेरी मोहब्बत पे, मेरे दिलबर।।
झुकाता हूँ तेरी दर पर, मैं सिर बार बार।
मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए बार बार।।
इसलिए तुमसे मिलता हूँ——————-।।
दुश्मन तेरा होता , लहू क्यों अपना बहाता।
क्यों तुमको मनाता,क्यों ऑंसू अपने बहाता।।
तुमसे वफ़ा हूँ , कहता हूँ तुमको बार बार।
मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए बार बार।।
इसलिए तुमसे मिलता हूँ——————-।।
अपनों से तोड़े रिश्तें , किसलिए मेरी जान।
तेरा साथ दिया हमेशा, किसलिए मेरी जान।।
सुनाने को यह सच मैं, आता हूँ बार बार।
मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए बार बार।।
इसलिए तुमसे मिलता हूँ———————।।

About author 

Gurudeen verma
शिक्षक एवं साहित्यकार-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)


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