इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार | isliye tumse milta hu mai bar bar
इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार इसलिए तुमसे मिलता हूँ , मैं बार बार। मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए …
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शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार
हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल
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लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी
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बहरूपिया-जयश्री बिरमी
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लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी
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