इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार | isliye tumse milta hu mai bar bar
इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार इसलिए तुमसे मिलता हूँ , मैं बार बार। मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए …
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माँ का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी
January 25, 2022
कविता -माँ का आँचल माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने देबचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ
अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 25, 2022
अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं दुनिया में लोगों ने पहलेअपनी – अपनी आस्था के अनुसारमंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारेऔर भी नाना
शीत लहर – डॉ. इन्दु कुमारी
January 25, 2022
शीत लहर है बड़ी शबाब परहाड़ कंपाने वालीअमीरों की कुछ नहै बिगाड़ने वालीगरीबों की झोपड़ीमें सनसनी फैलानेधाक जमाने वालीआहत करने
चाँद और मैं- सिद्धार्थ गोरखपुरी
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अंजान राहें!- अनिता शर्मा
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अंजान राहें!! है अंजान राहें थमती नहींनित नये रास्ते मिलते ही जायें।जीवन डगर पर मुस्कान बिखेरीबढ़ते चले हैं बाधाओं से
स्वतंत्रत विचार- अनिता शर्मा झाँसी
January 25, 2022
स्वतंत्रत विचार एक टूटता हुआ तारा!!असमान में बिखरे तारेकितने सुन्दर कितने प्यारे। अपलक रोज निहारा करतीसहसा टूटा एक तारा…अनायास ही
